अघोरी पूजा के नाम पर वसूली के आरोप में 'मामा' भोसले की 24 की टोली पर मकोका
सोलापुर ग्रामीण पुलिस ने अघोरी पूजा और ढोंग के नाम पर भक्तों से पैसे ऐंठने के आरोपी मनोहर उर्फ 'मामा' भोसले की टोली पर मकोका के तहत कार्रवाई की है।
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अघोरी पूजा, ढोंग और झूठे धार्मिक विधियों का लालच देकर आम लोगों से पैसे ऐंठने के आरोप में घिरी 'मामा' की टोली पर सोलापुर ग्रामीण पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। टोली के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून, यानी मकोका, के तहत कार्रवाई हुई है। पुलिस जांच में कुल 24 आरोपियों का संगठित नेटवर्क सामने आया है।
इस नेटवर्क के केंद्र में करमाला तालुका के उंदरगांव का रहने वाला मनोहर उर्फ 'मामा' भोसले है। उसके प्रमुख साथी के तौर पर दत्तकला शिक्षण संस्था के अध्यक्ष रामदास झोल का नाम भी आया है। ढोंग के नाम पर खड़े किए गए इस आर्थिक साम्राज्य पर पुलिस की कार्रवाई इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।
कुर्डूवाडी पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले की जांच के दौरान टोली के कामकाज का चौंकाने वाला तरीका सामने आया। जांच में पता चला है कि झूठी और अघोरी पूजा का लालच देकर भक्तों से दान के नाम पर नकद रकम ली जाती थी। ऑनलाइन भी पैसे लिए जाते थे और फिर उस रकम को ठिकाने लगाने के लिए अलग इंतजाम किया जाता था। पुलिस के मुताबिक पैसे सीधे लेने वाले, पैसा इधर-उधर करने वाले और उसे ठिकाने लगाने में मदद करने वाले, यानी कुल 24 आरोपी निकले हैं।
मुख्य आरोपी मनोहर उर्फ मामा भोसले और उसके साथी विशाल उर्फ नाथबाबा वाघमारे को 25 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और टोली के पैसों के लेन-देन का पीछा किया। जांच में सामने आया है कि मामा भोसले के कहने पर लोगों से पैसे वसूले जा रहे थे और वह रकम आगे अलग-अलग रास्तों से घुमाई जा रही थी।
पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह निकली कि आरोपी रामदास झोल और माया झोल की दत्तकला शिक्षण संस्था का कथित तौर पर इन आर्थिक लेन-देन के लिए इस्तेमाल हुआ। यह संस्था स्वामी चिंचोली, तालुका दौंड, जिला पुणे में है। जांच के मुताबिक संस्था के कर्मचारियों की मदद से धोखाधड़ी की नकद रकम संस्था में लाई जाती थी। फिर उसे वैध दिखाकर वापस मनोहर भोसले तक पहुंचाया जाता था।
पुलिस ने बताया है कि ढोंग की आड़ में चल रही इन संगठित गतिविधियों से सोलापुर ग्रामीण, पुणे जिले और आसपास के लोगों में डर और दहशत का माहौल बना। मनोहर भोसले पहले भी एक मामले में गिरफ्तार होकर जमानत पर बाहर आया था। जांच में सामने आया कि इसके बाद वह फिर से आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय हो गया। पुलिस जांच में यह भी उजागर हुआ है कि अपराध से मिले पैसे से अचल संपत्ति खरीदी गई।
टोली के संगठित स्वरूप, पैसों के लेन-देन के जाल और लोगों में फैली दहशत को देखते हुए सोलापुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक अतुल कुलकर्णी ने कोल्हापुर परिक्षेत्र के विशेष पुलिस महानिरीक्षक रंजन कुमार शर्मा को मकोका की धाराएं जोड़ने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ मकोका की धाराएं जोड़ी गई हैं।
मकोका क्यों लगाया गया, इसके बारे में जांच के निष्कर्ष ये हैं: संगठित तरीके से लोगों के साथ आर्थिक धोखाधड़ी, पैसों का ऑनलाइन और नकद लेन-देन, धोखाधड़ी की रकम ठिकाने लगाने का अलग इंतजाम और अपराध के पैसे से संपत्ति की खरीद। इन्हीं वजहों से टोली के खिलाफ यह कानून लगाया गया है।
मामले की आगे की जांच करमाला उपविभाग की सहायक पुलिस अधीक्षक अंजना कृष्णा कर रही हैं। पुलिस ने अंधविश्वास, अघोरी पूजा और ढोंग के नाम पर आम लोगों से धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। पुलिस अधीक्षक अतुल कुलकर्णी ने अपील की है कि ऐसी धोखाधड़ी होने पर लोग तुरंत पुलिस से संपर्क करें।