हंपी घूमने का प्लान: विरुपाक्ष मंदिर से लोटस महल तक, ऐसे पहुंचें
कर्नाटक के हंपी में कौन सी जगहें देखें और फ्लाइट, रेलवे या सड़क से वहां कैसे पहुंचें।
अगर आपको इतिहास में दिलचस्पी है और पुरानी जगहें देखना पसंद है, तो कर्नाटक का हंपी आपके लिए अच्छी जगह साबित हो सकता है। यहां प्राचीन अवशेष, मंदिर, इतिहास और खूबसूरत पहाड़ देखने को मिलते हैं। तुंगभद्रा नदी के किनारे बसा हंपी कभी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था। आज भी यहां भव्य इमारतें, बाजार, राजमहल, पुराने मंदिर और पत्थर में तराशे अवशेष दिखते हैं।
हंपी में सबसे पहले विरुपाक्ष मंदिर देखने लायक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां के खास मंदिरों में गिना जाता है। यहां आज भी नियम से पूजा-अर्चना होती है। मंदिर का ऊंचा गोपुरम दूर से ही नजर आता है और यह हंपी बाजार के पास बसा है।
दूसरी जगह है विजय विठ्ठल मंदिर और स्टोन चैरियट। इस मंदिर की गिनती हंपी के सबसे सुंदर और ऐतिहासिक मंदिरों में होती है। यहां बेहद खूबसूरत नक्काशी वाले स्तंभ देखने को मिलते हैं। इस जगह का मुख्य आकर्षण ग्रेनाइट के पत्थर में तराशा हुआ पत्थर का रथ है, जो भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को समर्पित है। रथ के पास हाथियों की मूर्तियां भी हैं। यह मंदिर 50 रुपये के नोट पर भी देखा जा सकता है।
यहां लोटस महल भी देखा जा सकता है। यह महल रॉयल सेंटर में है और इसका डिजाइन कमल जैसा बनाया गया है, इसीलिए इसका नाम लोटस यानी कमल पड़ा। बालकनी, कमानें और पूरी बनावट इसे दूसरे मंदिरों से अलग बनाती है।
हंपी बाजार भी जाना न भूलें। यह बाजार विजयनगर साम्राज्य के जमाने से चल रहा है और उस वक्त बड़े व्यापारिक केंद्र के तौर पर जाना जाता था। बाजार की सड़क पर आज भी प्राचीन पत्थर के मंडप दिखते हैं। उस दौर में यहां हीरे, मोती, घोड़े और मसालों का व्यापार होता था।
अब बात हंपी पहुंचने की। फ्लाइट से आना हो तो सबसे नजदीकी एयरपोर्ट विजयनगर एयरपोर्ट है, जहां से हंपी 40 किमी दूर है। बेंगलुरु का केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी एक विकल्प है।
रेलवे से आने वालों के लिए होसपेट जंक्शन सबसे पास का रेलवे स्टेशन है, जहां से हंपी करीब 13 किमी है। स्टेशन से कैब या बस लेकर हंपी जा सकते हैं।
अपनी कार से सड़क के रास्ते जाना हो तो सफर की शुरुआत मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से करनी होगी। इसके बाद सातारा, बेलगाम और लक्कमपुर होते हुए हॉस्पेट और वहां से हंपी पहुंचा जाता है। मुंबई से हॉस्पेट के लिए सीधी प्राइवेट बसें भी मिलती हैं।