शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

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04:43 IST

रेलवे टिकट के दाम मांग के हिसाब से घटेंगे-बढ़ेंगे, सर्ज कैप और छूट का प्रस्ताव

भारतीय रेलवे डायनामिक सर्ज कैप और लचीले किराए की नई व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसमें भीड़ के सीजन में 25 प्रतिशत तक ज्यादा और कम मांग पर छूट का प्रावधान है।

रेलवे टिकट के दाम मांग के हिसाब से घटेंगे-बढ़ेंगे, सर्ज कैप और छूट का प्रस्ताव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

भारतीय रेलवे टिकट के दाम और उसकी पूरी व्यवस्था में बदलाव करने की सोच रही है। बताया जा रहा है कि कई दशकों से चली आ रही पारंपरिक किराया ढांचे और फ्लेक्सी-फेयर सिस्टम को बदलने की तैयारी है। इस तरह भारत की रेल व्यवस्था एक बड़े बदलाव की तरफ बढ़ती दिख रही है।

डायनामिक सर्ज कैप और लचीली किराया नीति का नया प्रस्ताव विचाराधीन है। इसके तहत मांग और सप्लाई के आधार पर रेल टिकट के दाम अपने आप तय होंगे। हालांकि अंतिम फैसला कब होगा और उसमें ठीक-ठीक क्या प्रावधान होंगे, यह अभी साफ नहीं है।

प्रस्ताव के मुताबिक भीड़ के सीजन और त्योहारों के वक्त मूल टिकट दर पर 25 प्रतिशत तक ज्यादा किराया वसूला जा सकेगा, इससे ऊपर नहीं। यानी सर्ज कैप लागू रहेगी और यात्रियों से मनमाना दाम नहीं लिया जाएगा। दूसरी तरफ, जिन रूटों पर मांग कम रहती है, वहां के यात्रियों को 10 से 25 प्रतिशत की सीधी छूट देने का प्रावधान किया जाएगा। दावा किया गया है कि इस दोहरी किराया व्यवस्था से कम बजट वाले यात्रियों को सस्ती टिकट मिल सकेगी।

यह भी कहा जा रहा है कि कम यात्रियों वाली ट्रेनों की सीटों की मांग बढ़ने से रेलवे के राजस्व को फायदा हो सकता है।

आखिरी वक्त पर भी मिल सकती है छूट

ट्रेन का चार्ट बनने से 24 से 48 घंटे पहले अगर ट्रेन की 30 प्रतिशत से ज्यादा सीटें खाली रहती हैं, तो सिस्टम में अपने आप मूल टिकट दर पर 10 से 15 प्रतिशत की छूट दी जा सकेगी। इसके अलावा ऑफ-सीजन में, या उन रूटों पर जहां यात्री लगातार कम रहते हैं, आखिरी लम्हे में खाली सीटें भरने के लिए टिकट दर पर 25 प्रतिशत तक छूट देने का प्रस्ताव भी है। अलग-अलग रेलवे जोन के यात्री ट्रैफिक की जानकारी और राजस्व के मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। रेलवे का दावा है कि ऑफ-सीजन में 25 प्रतिशत तक की छूट मध्यम वर्ग, छात्रों और कम खर्च में सफर करने वालों को आकर्षित करेगी।

कौन-सी गाड़ियों पर लागू हो सकता है

राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, तेजस, हमसफर, गरीब रथ, जन शताब्दी और सभी मेल/एक्सप्रेस गाड़ियां इसके दायरे में आ सकती हैं। लेकिन लोकल, MEMU, DEMU और सीजन टिकट पर यह लागू नहीं होगा।

दाम क्यों बढ़ाए जा रहे हैं

रेलवे का कहना है कि एक यात्री पर 100 रुपये खर्च आता है, जबकि टिकट से सिर्फ 55 रुपये वसूल होते हैं। बाकी 45 प्रतिशत सब्सिडी सरकार देती है, जो सालाना 60,000 करोड़ रुपये बैठती है। ईंधन, मेंटेनेंस और वेतन बढ़ने की वजह से साल में 600-700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई के लिए यह मामूली बढ़ोतरी की जा रही है।

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