राष्ट्रवादी कांग्रेस की दोनों पार्टियों में बेचैनी, एक तरफ पवार की सेहत, दूसरी तरफ नेतृत्व का सवाल
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शरद पवार की बिगड़ती सेहत और अजित पवार के निधन के बाद पार्टी में नेतृत्व को लेकर उठे सवालों से राष्ट्रवादी कांग्रेस की दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता और नेता चिंता में हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस की दोनों पार्टियों में इन दिनों बेचैनी का माहौल है। शरद पवार की सेहत ठीक नहीं रहती और सार्वजनिक जीवन में उनकी मौजूदगी कम हो रही है, इसका असर कार्यकर्ताओं के मन पर है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) की आगे की राह पर भी इसकी छाया पड़ना तय माना जा रहा है, क्योंकि यह पार्टी अब तक पवार के उत्साह और ताकत के भरोसे ही चलती आई है।
पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार हाल ही में पुणे के रुबी हॉल क्लिनिक और फिर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती रहे। वे 85 साल के हैं और अगले महीने 12 दिसंबर को 86वें साल में कदम रखेंगे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सीधे फोन किया। पवार के बचपन के दोस्त विट्ठल मणियार के कहने के मुताबिक मोदी ने कहा, "पवार साहब, आप सेहत का ध्यान रखिए, आराम कीजिए। देश की चिंता मत कीजिए। सुप्रिया दीदी और हम उसे देख लेंगे..!"
मोदी और पवार के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं। मोदी ने सार्वजनिक तौर पर कहा था, "पवार की उंगली पकड़कर ही मैं राजनीति में आया।" इसी नज़दीकी की वजह से कांग्रेस नेता पवार को लेकर हमेशा थोड़े शंकित रहते हैं। अब सवाल उठ रहा है कि मोदी के इन शब्दों का क्या मतलब निकाला जाए, और क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) तथा भाजपा के बीच किसी तरह की बातचीत चल रही है। सुप्रिया सुले ने मणियार की बात को न नकारा, न स्वीकारा। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि ऐसी बातचीत दो लोगों के बीच निजी होती है और निजी ही रहनी चाहिए।
अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को विमान हादसे में मौत हो गई थी। उसके बाद से उनकी पार्टी में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। हादसे के बाद शरद पवार की तरफ से यह बात सामने आई कि अजित पवार दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों के विलय पर बातचीत कर रहे थे। एकत्रित राष्ट्रवादी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने बताया कि विलय के लिए अजित पवार के साथ कितनी बैठकें हुईं। सुनील तटकरे से लेकर छगन भुजबल तक, अजित पवार के करीबी साथियों ने इन चर्चाओं से इनकार किया और कहा कि अजित पवार ने कभी उनसे ऐसी बात नहीं की थी।
अजित पवार के निधन के तीसरे दिन पार्टी की कमान औपचारिक रूप से सुनेत्रा पवार को सौंपी गई। चौथे दिन राजभवन में एक सादे समारोह में वे राज्य की उपमुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पार्टी दफ्तर और मंत्रालय में सुनेत्रा पवार के कक्ष में दिखने लगे। अप्रैल 2026 में उन्हें राज्यसभा की सीट मिली। पार्थ 2019 में एकत्रित राष्ट्रवादी के टिकट पर मावल से लोकसभा चुनाव लड़े थे और शिवसेना के श्रीरंग बारणे से दो लाख से ज़्यादा वोटों से हार गए थे।
हाल में शिकायतें सुनाई दे रही थीं कि पार्थ पवार मंत्रिमंडल में राष्ट्रवादी के विभागों में दखल दे रहे हैं। मुंबई राष्ट्रवादी के अध्यक्ष पद पर विधायक झीशान सिद्दीकी की नियुक्ति पार्थ के आग्रह पर हुई, लेकिन भुजबल और तटकरे को इसकी पहले जानकारी नहीं दी गई थी। मुख्य प्रवक्ता पद पर उमेश पाटिल की नियुक्ति में भी यही हुआ। इसी माहौल में दिलीप वलसे पाटिल, भुजबल, तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और हसन मुश्रीफ जैसे वरिष्ठ नेताओं ने देर रात दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उससे पहले मुंबई में भुजबल के बंगले पर इन नेताओं की बैठक हुई। दोनों मौकों पर सुनेत्रा पवार को नहीं बुलाया गया था। इससे पहले अक्टूबर के आखिर में सुनेत्रा पवार और पार्थ दिल्ली जाकर मोदी और शाह से मिले थे।
अजित पवार के पास रहा वित्त विभाग फिर से राष्ट्रवादी को देने की मांग कई महीनों से चल रही है। उसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने ही पास रखा है। भाजपा का विचार दिखता है कि दिया भी जाए तो सुनेत्रा पवार की जगह दिलीप वलसे पाटिल जैसे अनुभवी पूर्व वित्त मंत्री को दिया जाए। अजित पवार के नाम पर जीते सभी विधायक बेचैन हैं। सुनेत्रा पवार ने दिल्ली दौरों के बाद विधायकों की जो तुरंत बैठक बुलाई, उसमें 41 में से सिर्फ तीस विधायक पहुंचे।
2024 के विधानसभा चुनाव में शरद पवार की पार्टी के सिर्फ दस विधायक जीते थे, जबकि अजित पवार की पार्टी के 41 विधायक चुने गए थे। लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी ने महाराष्ट्र में 31 सीटें जीती थीं। आज एक तरफ नेता की सेहत की चिंता है और दूसरी तरफ सक्षम नेतृत्व का सवाल, और दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आगे की राह को लेकर परेशान हैं।


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