मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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अमित शाह से मिले राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, तटकरे बोले पार्टी में नाराजगी नहीं

अमित शाह से मिले राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, तटकरे बोले पार्टी में नाराजगी नहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस में नियुक्तियों, वित्त मंत्रालय और विलीनीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व मतभेद से इनकार कर रहा है।

अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस की राजनीति में कई बदलाव दिख रहे हैं। पार्टी की कमान सुनेत्रा पवार के हाथ में है, लेकिन संगठन के फैसलों में पार्थ पवार का बढ़ता दखल चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे और दिलीप वळसे पाटील जैसे अनुभवी नेताओं की क्या भूमिका रहेगी, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर है। सवाल उठ रहा है कि पार्टी में सचमुच सत्ता की खींचतान चल रही है या ये सिर्फ संगठन के भीतर के मतभेदों की बातें हैं।

अजित पवार के जाने के बाद पार्टी के सामने नेतृत्व का सवाल खड़ा हुआ। सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है। फिर भी चर्चा है कि संगठन के फैसलों में पार्थ पवार का असर बढ़ रहा है। कुछ सूत्रों का आरोप है कि नई नियुक्तियां और संगठन में बदलाव करते वक्त वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में नहीं लिया जा रहा।

खबर है कि मुंबई अध्यक्ष के पद पर विधायक झिशान सिद्दीकी और राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता के पद पर उमेश पाटील को बिठाते समय कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों से बात नहीं की गई, और इस पर नाराजगी जताई गई। इससे पहले युवक अध्यक्ष और युवती अध्यक्ष के चुनाव में भी सर्वसम्मति से फैसला होने की उम्मीद थी। चर्चा है कि पार्थ पवार ने वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लिए बिना फैसले लिए।

इसी पृष्ठभूमि में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे, दिलीप वळसे पाटील, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे और समीर भुजबल ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। खास बात यह रही कि इस प्रतिनिधिमंडल में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार मौजूद नहीं थे। इससे पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर सवाल उठे।

सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात में वित्त मंत्रालय का मुद्दा भी उठा। अजित पवार के पास राज्य का वित्त विभाग था। उनके निधन के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह विभाग अपने पास ले लिया। सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी नेताओं को उम्मीद थी कि वित्त विभाग फिर राष्ट्रवादी को मिलेगा, पर अब तक यह मुख्यमंत्री के पास ही है। बताया जाता है कि आने वाले मंत्रिमंडल फेरबदल में वित्त मंत्रालय वापस पाना वरिष्ठ नेताओं की मुख्य मांग है।

इससे पहले 25 अक्टूबर को मुंबई में अजित पवार के सरकारी निवास देवगिरी पर पार्टी की कोर कमेटी की बैठक हुई थी। कहा जाता है कि उसमें भी वित्त विभाग की मांग पर बात हुई। बैठक के बाद छगन भुजबल ने साफ किया था कि दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलीनीकरण पर कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा था कि वित्त मंत्रालय फिर हासिल करने पर पार्टी में सहमति है।

शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस के संभावित विलीनीकरण की चर्चा कुछ समय से चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित बारामती दौरे के चलते इन चर्चाओं को और अहमियत मिली है। जानकारी है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता दोनों दलों का एक होना नहीं चाहते। चर्चा है कि कुछ नेताओं को डर है कि विलीनीकरण हुआ तो पार्टी में पवार परिवार का दबदबा बढ़ेगा और अभी असरदार भूमिका निभा रहे वरिष्ठ नेताओं का महत्व घट सकता है। दोनों गुट साथ आएं तो केंद्र में एनडीए को शरद पवार गुट के 8 सांसदों का समर्थन मिल सकता है, इसलिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका अहम होगी। खबर है कि कोर कमेटी के नेताओं ने अमित शाह के सामने कहा कि वे दोनों पार्टियों का एकीकरण नहीं चाहते।

महाराष्ट्र विधान परिषद की पुणे स्नातक सीट के चुनाव से राष्ट्रवादी कांग्रेस के हट जाने पर भी नाराजगी की बात कही जा रही है। इस सीट को पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। कई नेता चुनाव लड़ना चाहते थे, फिर भी उम्मीदवार न उतारने का फैसला हुआ। इसका फायदा शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस को हुआ और उसने यह सीट जीत ली। चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं को शक है कि क्या अजित पवार गुट ने शरद पवार गुट की परोक्ष मदद की रणनीति के तहत मैदान छोड़ा।

दूसरी तरफ कोर कमेटी की बैठक के बाद सुनील तटकरे ने मीडिया से बात करते हुए पार्टी में नाराजगी की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है और बैठक में संगठन के कामकाज, आने वाले कार्यक्रमों और राज्य में सूखे के हालात पर बात हुई। विलीनीकरण के बारे में पूछे जाने पर तटकरे ने कहा कि इस मुद्दे पर अब पर्दा पड़ चुका है। उनके मुताबिक शरद पवार की पार्टी ने भी और उनकी पार्टी ने भी इस पर अपना रुख साफ कर दिया है।

राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटील ने कहा कि अमित शाह के साथ बैठक पहले से तय और औपचारिक थी। उन्होंने दावा किया कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को जानबूझकर अलग रखने की खबरें गलत हैं। उनका कहना था कि कुछ राजनीतिक ताकतें पार्टी में मतभेद का माहौल बना रही हैं। उमेश पाटील के मुताबिक सुनेत्रा पवार की अगुवाई में राष्ट्रवादी कांग्रेस एकजुट है और महायुति का अहम हिस्सा है।

सूत्रों ने बताया कि कोर कमेटी की बैठक में यह रुख रखा गया कि आगे के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसले अनुभवी नेताओं से बात करके ही लिए जाएं। सूत्रों के मुताबिक पार्थ पवार और जय पवार की ओर से भरोसा दिया गया है कि अब फैसले वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल बिठाकर होंगे। एक तरफ पार्थ पवार का बढ़ता प्रभाव है, दूसरी तरफ पटेल, भुजबल, तटकरे और वळसे पाटील जैसे नेताओं का राजनीतिक वजन, और तीसरी तरफ शरद पवार गुट के साथ संभावित समीकरणों का सवाल।

ये घटनाक्रम सिर्फ नेतृत्व तक सीमित नहीं हैं। इनका असर पार्टी की फैसले लेने की प्रक्रिया, मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी और आगे की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है। हालांकि पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व ने नाराजगी और गुटबाजी से इनकार किया है, इसलिए अभी सामने आ रही कई बातें सूत्रों की जानकारी और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित हैं। आने वाला मंत्रिमंडल फेरबदल, पार्टी की नियुक्तियां और दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों की आगे की भूमिका तय करेंगी कि तस्वीर कैसी बनती है।

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