रूस-यूक्रेन जंग में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमति, ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले न करने पर राजी हो गए हैं, जिसे युद्धविराम की तरफ पहला कदम माना जा रहा है।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे की ऊर्जा से जुड़ी पायाभूत सुविधाओं पर हमले न करने पर सहमति जता दी है।
अगर ऊर्जा प्रोजेक्ट, बिजली केंद्रों और फ्यूल से जुड़े ढांचे पर हो रहे हमले सच में रुक जाते हैं, तो इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जाएगा। हालांकि यह सहमति असल में कितने दिन टिकती है और इस पर अमल कैसे होता है, इस पर अभी पूरी दुनिया की नजर लगी हुई है।
इस जंग में ऊर्जा से जुड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर लगातार बड़ा निशाना बनता रहा है। बिजली केंद्रों, तेल और गैस की सुविधाओं के साथ-साथ बाकी ऊर्जा प्रोजेक्ट्स पर हुए हमलों से भारी नुकसान हो चुका है। खासकर सर्दी के मौसम में बिजली सप्लाई पर असर पड़ने से आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
ऐसे हालात में अगर ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की सहमति बन जाती है, तो इससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल सकती है। बिजली सप्लाई और बाकी जरूरी सेवाओं को सुचारू रखने में भी इससे मदद मिलने की संभावना है।
रूस-यूक्रेन जंग को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन की तरफ से डिप्लोमैटिक कोशिशें लगातार जारी हैं। दोनों देशों के बीच सीधे शांति समझौता होने से पहले कुछ खास क्षेत्रों में हमले रोकने वाले समझौते के जरिए भरोसा बनाने की कोशिश की जा रही है।
ऊर्जा सुविधाओं पर हमले रोकना इसी दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। लेकिन जंग के मैदान के हालात बेहद उलझे हुए हैं, इसलिए सिर्फ ऐलान से जंग खत्म नहीं होने वाली। दोनों तरफ से इस सहमति का पालन करना और उसके बाद आगे के मुद्दों पर बातचीत करना जरूरी होगा।
ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकने की यह सहमति बड़े पैमाने पर युद्धविराम की पहली सीढ़ी बन सकती है। पिछले कई महीनों से चल रही इस लड़ाई में सैनिकों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। ऐसे में यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस सीमित युद्धविराम से आगे चलकर स्थायी शांति का रास्ता बनेगा।
इस बीच रूस और यूक्रेन दोनों देशों के रुख पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। अगर ऊर्जा सुविधाओं पर हमले वाकई रुक जाते हैं और यह सहमति टिकी रहती है, तो आगे की बातचीत के लिए माहौल बन सकता है। जंग के मैदान में मिसाइलों की आवाज कम होने की यह शुरुआत साबित होती है या यह सिर्फ एक टेंपररी ब्रेक है, यह आने वाले वक्त में साफ होगा।