शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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गोकुल में सरकारी संचालकों पर राज ठाकरे का भाजपा से सवाल, सतेज पाटील के गठबंधन के साथ

गोकुल में सरकारी संचालकों पर राज ठाकरे का भाजपा से सवाल, सतेज पाटील के गठबंधन के साथ
राज ठाकरे | फाइल फोटो | Navbharat Live
PT24 टीम

मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने गोकुळ दूध संघ में पांच सरकारी संचालक नियुक्त करने के फैसले पर भाजपा को घेरा है।

गोकुल दूध संघ में कुर्सी को लेकर चल रही रस्साकशी में अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट डालकर भाजपा को सीधे घेरा है और पूछा है कि संघ के बोर्ड में सरकार की तरफ से पांच संचालक क्यों बिठाए जा रहे हैं। राज ठाकरे इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता सतेज पाटील (Satej Patil) के गठबंधन के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं।

पहले यह समझ लें कि मामला है क्या। गोकुल के चुनाव में सदस्यों ने सतेज पाटील के हमख्याल लोगों के गठबंधन पैनल को साफ बहुमत दिया। नतीजे में पाटील के पैनल से 13 लोग जीतकर आए, जबकि भाजपा के पैनल के हिस्से में 12 सीटें आईं। इसके बावजूद भाजपा तेवर ढीले करने को तैयार नहीं है। नतीजों के फौरन बाद बोर्ड में पांच सरकारी संचालक नियुक्त करने का फैसला हुआ, और इनमें से चार को वोट डालने का हक भी मिलेगा। जानकारों को डर है कि इस इंतजाम से अध्यक्ष की कुर्सी सतेज पाटील के गठबंधन के हाथ से निकल सकती है। राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस अदालत जाने की तैयारी में है।

राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में भाजपा को अजीब सी पार्टी बताया। उनका कहना है कि जो पार्टी नीचे से लेकर ऊपर तक सत्ता में बैठी है, वही लोकतंत्र बचाने के नाम पर मोर्चे निकाल रही है, यह नजारा हैरान करने वाला है। उनके मुताबिक पूरी दुनिया में शायद यह अकेला मामला होगा, जहां सत्ता में बैठी पार्टी विपक्ष के खिलाफ सड़क पर उतरे।

गोकुल को लेकर उन्होंने सीधा सवाल रखा। उन्होंने लिखा कि अगर लोकतंत्र की इज्जत करने की सच में इतनी चाह है, तो बताइए कि भाजपा पैनल के 12 के सामने सतेज पाटील पैनल के 13 उम्मीदवार जीते, उसके तुरंत बाद सरकार ने, यानी भाजपा ने, अपने ही पांच संचालक क्यों बिठा दिए? और उन्हें वोट का अधिकार देकर आखिर क्या साबित करना है? राज ठाकरे ने याद दिलाया कि बाकी संचालक बैलेट पर वोटिंग करवाकर, यानी लोकतांत्रिक रास्ते से चुनाव लड़कर आए हैं।

उनका कहना था कि भाजपा को लोकतंत्र की जरा भी फिक्र होती तो वह ऐसा कदम न उठाती। उनका आरोप है कि गोकुल की सत्ता हाथ नहीं लगी तो पार्टी ने सारे उसूल ताक पर रख दिए, और ऊपर से लोकतंत्र बचाओ के नारे के साथ मोर्चे भी निकालेगी।

तंज कसते हुए राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में पानी का भयानक सूखा पड़ा है और भाजपा में समझदारी का भी भयानक सूखा है। ये दोनों सूखे एक साथ कैसे आ गए, यही सोचकर उन्हें हैरानी होती है।

उन्होंने आगे कहा कि सत्ता में रहकर ये लोग लोकतंत्र बचाने के मोर्चे भी निकालेंगे और लोकतंत्र का गला भी खुद घोंटेंगे। उनके मुताबिक इनके राज में आतंकी हमले हुए और कानून व्यवस्था बिगड़ी, तो अब ये देश को आतंकवाद से बचाने के लिए मोर्चे निकालेंगे। देश की अर्थव्यवस्था गड्ढे में चली गई है, तो उसे बचाने के नाम पर भी मोर्चे निकाले जाएंगे।

पोस्ट के आखिर में राज ठाकरे ने भाजपा से कहा कि वह यह चाल खेलना बंद करे। एक रिपोर्ट में इसे धोखे का दांव कहा गया है, जबकि दूसरी में इसे रोने वाला खेल बताया गया है, यानी हार पर रोने का खेल। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जिस भी रास्ते से बहुमत हासिल किया, सारे विपक्षी दलों ने उसे 12 साल तक बर्दाश्त किया। अब देश की जनता का झुकाव विपक्ष की ओर होने लगा है, तो भाजपा को भी यह सब सहना सीखना चाहिए।

अब नजर इस पर है कि सरकार अपने फैसले पर कायम रहती है या नहीं, और कांग्रेस अदालत में क्या दलील रखती है। तब तक गोकुल के अध्यक्ष पद का फैसला अटका रहेगा।

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