गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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गोकुल में सरकारी संचालक: सतेज पाटील भड़के, 9 नवंबर को कोल्हापुर में मोर्चा

गोकुल में सरकारी संचालक: सतेज पाटील भड़के, 9 नवंबर को कोल्हापुर में मोर्चा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

कांग्रेस नेता सतेज पाटील ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गोकुल दूध संघ पर कैबिनेट के फैसले का विरोध किया और 9 नवंबर को दसरा चौक से मोर्चे का ऐलान किया।

कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ में अध्यक्ष की कुर्सी की खींचतान अब सड़क तक पहुंचने वाली है। राज्य सरकार ने संघ में अपनी तरफ से विशेषज्ञ संचालक बिठाने का फैसला किया है। कांग्रेस नेता सतेज (बंटी) पाटील ने इसके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है और ऐलान किया है कि 9 नवंबर को कोल्हापुर में मोर्चा निकलेगा।

मुंबई में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें महायुती सरकार के इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई। बताया गया है कि गोकुल में सरकार की तरफ से 5 विशेषज्ञ संचालक नियुक्त होंगे और इनमें से 4 गैर-सरकारी सदस्यों को वोट डालने का हक भी मिलेगा। उसी बैठक में एक और प्रस्ताव पास हुआ। इसके तहत राज्य की जिन सहकारी संस्थाओं का कारोबार तीन हजार करोड़ रुपये से ऊपर है, वहां सरकार खुद संचालक बिठाएगी और उन्हें वोट देने का अधिकार भी रहेगा।

अब असली मामला समझिए। कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ, यानी गोकुल, के हाल के चुनाव में कुल 25 सीटों में से 13 राजर्षी शाहू शेतकरी समविचारी आघाडी को मिलीं, जबकि महायुती के हिस्से 12 सीटें आईं। फिलहाल संघ में सतेज पाटील के गुट का ही बहुमत है। अध्यक्ष चुनने की सभा तभी हो सकती है जब 14 लोग मौजूद हों, और यह कोरम महायुती के पास नहीं है। इसी वजह से अध्यक्ष का चुनाव अब तक अटका पड़ा है। लेकिन अगर चार सरकारी सदस्य बाहर से आकर वोट डालने लगें, तो पूरी तस्वीर पलट सकती है और अध्यक्ष महायुती का बन सकता है।

पाटील ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस फैसले की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि सरकार किसी भी तरह गोकुल की सत्ता हथियाना चाहती है और कोल्हापुर के लोगों ने जो फैसला उनके पक्ष में दिया, उसे मानने को तैयार नहीं। वे इस फैसले का भी विरोध करते हैं और कल के मंत्रिमंडल के निर्णय का भी। पाटील के मुताबिक तकनीकी बहाना बनाकर उनका बहुमत दूसरी तरफ खिसकाने की कोशिश हो रही है, महाराष्ट्र की जनता यह सब देख रही है और सरकार को जवाब देना पड़ेगा।

पाटील ने बताया कि इन चार सदस्यों की मंजूरी की फाइल दस्तखत के लिए राज्यपाल के पास भेजी जा चुकी है। उनका आरोप है कि नतीजा मनमाफिक नहीं आया तो कानून ही बदला जा रहा है, जबकि बदलाव चुनाव से पहले होना चाहिए था। उन्होंने तंज कसा कि जिन्हें वोटरों ने ही ठुकरा दिया, उन्हें अब विशेषज्ञ कहा जा रहा है, और वे विशेषज्ञ होते तो लोग उन्हें क्यों नकारते।

कानूनी लड़ाई पर पाटील ने साफ कहा, "जितने भी कानूनी रास्ते हैं, वे सब मैं अपनाऊंगा। मैं चुप नहीं बैठूंगा, साढ़े पांच लाख किसानों ने यह जनादेश दिया है।" उनका कहना है कि अगर लोगों का जनादेश ठुकराया गया, तो सड़क पर उतरने की तैयारी भी रखी गई है। उन्हें भरोसा है कि अदालत में उनका पक्ष मजबूत रहेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमूल में भी ऐसे ही संचालक बिठाए गए थे, मगर हाईकोर्ट ने उसे नामंजूर कर दिया था। उनका सवाल है कि यह कानून सिर्फ गोकुल के लिए ही क्यों लगाया जा रहा है।

पाटील ने महायुती पर कटाक्ष भी किया। उनके मुताबिक पूरा बहुमत होने के बावजूद सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए महायुती दो संचालकों का समर्थन मांग रही है, जो हास्यास्पद बयान है। उन्होंने कहा कि अगर यही तर्क है, तो नगर निगम में हमारे पांच पार्षद कम पड़ते हैं, महायुती हमें समर्थन दे और मेयर हमारा बना दे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर मतदाताओं ने उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है, तो उसे मानना चाहिए।

पाटील का आरोप है कि सरकार का इरादा गोकुल को अमूल के हवाले करने का है और वह लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने हसन मुश्रीफ का नाम लेकर पूछा कि अब उनके साथ कौन सी दोस्ती निभाई जा रही है। उनके अनुसार सरकार को किसानों की फिक्र नहीं, उसे बस सत्ता में बैठना है। उन्होंने कहा, "वोट चोरी के खिलाफ आवाज उठ रही है और अब सत्ता चोरी शुरू हो गई है।"

पाटील ने कहा कि उनकी तरफ से कोई गलत कदम नहीं उठाया जाएगा, लेकिन लोगों को सड़क पर उतरना पड़ेगा, क्योंकि ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है। उनके मुताबिक इसकी शुरुआत गोकुल से हुई है और आगे यह SRA तक पहुंच सकता है। कोल्हापुर की पहचान सहकार के तीर्थ की है, और सरकार उसी सहकार क्षेत्र पर ऐसा कानून थोप रही है। मोर्चा 9 नवंबर को दसरा चौक से शुरू होकर जिला कार्यालय तक जाएगा। आगे की रणनीति तैयार है, पर पाटील ने उसे अभी खोलने से मना कर दिया।

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