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पुर्तगाल में नागरिकता के लिए अब 10 साल का इंतजार, भारतीयों समेत कई देशों पर लागू

पुर्तगाल में नागरिकता के लिए अब 10 साल का इंतजार, भारतीयों समेत कई देशों पर लागू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

पुर्तगाल सरकार ने नागरिकता के नियम सख्त कर दिए हैं। गैर-यूरोपीय देशों के लोगों को अब 5 की जगह 10 साल रुकना होगा।

विदेश में बसने का सपना देखने वाले और खासकर पुर्तगाल जाने की सोच रहे भारतीयों के लिए फिक्र बढ़ाने वाली खबर आई है। पुर्तगाल सरकार ने नागरिकता के नियमों में बड़े और सख्त बदलाव किए हैं। अब तक जिन लोगों को 5 साल रहने के बाद आसानी से नागरिकता मिलने की उम्मीद थी, उन्हें अब इसके लिए पूरे 10 साल इंतजार करना पड़ेगा।

यह नया नियम सिर्फ भारत पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और नाइजीरिया समेत कई गैर-यूरोपीय देशों के नागरिकों पर भी लागू हुआ है। पहले विदेशी नागरिक 5 साल कानूनी तौर पर पुर्तगाल में रहकर नागरिकता के लिए अर्जी दे सकते थे। अब यह मियाद दोगुनी यानी 10 साल कर दी गई है। इससे कागजात संभालना और इतने साल तक कानूनी तौर पर टिके रहना और मुश्किल हो गया है।

दूसरी तरफ यूरोपियन यूनियन (EU) के सदस्य देशों और पुर्तगाली भाषा वाले देशों के नागरिकों के लिए यह मियाद 7 साल रखी गई है। इन देशों में अंगोला, मोझांबिक, केप वर्दे, गिनी-बिसाऊ, साओ टोमे और प्रिंसिपे, और इक्वेटोरियल गिनी शामिल हैं। यानी एशियाई देशों से गए लोगों को दूसरों के मुकाबले ज्यादा लंबा इंतजार करना होगा।

यह कानून अचानक नहीं आया। पुर्तगाली संसद ने इस विवादित कानून को 1 अप्रैल 2026 को पास किया था। राष्ट्रपति अंटोनियो होजे सेगुरो ने 3 मई को विधेयक पर दस्तखत किए और 19 मई 2026 से कानून लागू हो गया। इसके बाद 29 अक्टूबर 2026 को पुर्तगाली मंत्रिमंडल ने कानून पर अमल से जुड़े विस्तृत नियमों को मंजूरी दी।

सिर्फ रहने की मियाद ही नहीं बढ़ी, अर्जी देने वालों को अब और भी कड़ी शर्तें पूरी करनी होंगी। पहली शर्त यह है कि उन्हें पुर्तगाली भाषा की पर्याप्त जानकारी साबित करनी होगी। दूसरी, पुर्तगाल की संस्कृति, इतिहास और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गहरी जानकारी जरूरी है। तीसरी, अर्जदार का आर्थिक तौर पर पूरी तरह आत्मनिर्भर होना जरूरी है, ताकि वह अपना खर्च खुद उठा सके। चौथी, उसे पुर्तगाल के लोकतांत्रिक उसूलों और संविधान के प्रति अपनी निष्ठा साबित करनी होगी।

पांचवीं और सबसे अहम शर्त यह है कि रेजिडेंस परमिट (Residence Permit) के इंतजार में जो वक्त गुजरेगा, वह नागरिकता के लिए तय 10 साल में नहीं गिना जाएगा। इससे असल में रुकने का वक्त और लंबा हो जाएगा।

पुर्तगाल के न्याय मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक प्रशासनिक व्यवस्था पर भारी दबाव है। 30 जून 2026 तक देश में 6,90,480 नागरिकता की अर्जियां अलग-अलग वजहों से लंबित थीं। पिछले साल के मुकाबले इनमें 38 फीसदी का इजाफा हुआ है। इनमें करीब 26 फीसदी अर्जियां कानूनी रेजिडेंसी के आधार पर नागरिकता पाने के लिए हैं।

पुर्तगाल की संस्था AIMA (Agency for Integration, Migration and Asylum) के आंकड़ों के मुताबिक 2025 के आखिर तक अकेले भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के मिलाकर 2 लाख 42 हजार से ज्यादा लोग पुर्तगाल में रह रहे थे।

नियम सख्त होने से विदेशी नागरिकों में नाराजगी है, लेकिन पुर्तगाली सरकार का कहना है कि इन नए नियमों से आगे चलकर पूरी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी। राष्ट्रपति पद के मंत्री अंटोनियो लेटाओ अमारो ने साफ किया है कि डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल से प्रशासनिक कामकाज सरल होगा। उनके मुताबिक इससे अर्जियों का जमा बोझ खत्म करने और नए कानून को असरदार ढंग से लागू करने में बड़ी मदद मिलेगी।

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