गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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मध्यावधी चुनाव के बाद डेमोक्रेट्स का ट्रंप प्रशासन पर शिकंजा, इराण युद्ध की होगी जांच

मध्यावधी चुनाव के बाद डेमोक्रेट्स का ट्रंप प्रशासन पर शिकंजा, इराण युद्ध की होगी जांच तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सदस्य एडम स्मिथ ने पेंटागन की निगरानी, इराण संघर्ष और रक्षा बजट पर जांच की रूपरेखा रखी।

अमेरिका के हाल ही में हुए मध्यावधी चुनाव (US Midterms) में डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है और सत्ताधारी पार्टी को बड़ा झटका दिया है। जीत के फौरन बाद डेमोक्रेट्स सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर सख्ती से लगाम कसने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है।

विपक्षी पार्टी ने चेतावनी दी है कि पेंटागन के कामकाज, इराण में सैन्य कार्रवाइयों और अमेरिका के करोड़ों डॉलर के रक्षा सौदों जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन को कानून के दायरे में जवाबदेह बनाया जाएगा।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की काफी असरदार सशस्त्र सेवा समिति (House Armed Services Committee) के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सदस्य एडम स्मिथ (Adam Smith) ने पार्टी की आगे की नीतियों और प्राथमिकताओं की साफ रूपरेखा सामने रखी है। 120वीं कांग्रेस के संदर्भ में बोलते हुए स्मिथ ने कहा कि ट्रंप प्रशासन और पेंटागन के हर फैसले की जिम्मेदारी तय करना नई कांग्रेस का सबसे पहला काम होगा।

डेमोक्रेटिक पार्टी की रणनीति के मुताबिक पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों को कांग्रेस के सामने बुलाकर उनसे सार्वजनिक पूछताछ की जाएगी और उनकी गवाही दर्ज करने का सिलसिला बढ़ाया जाएगा। इसके लिए सशस्त्र सेवा समिति के भीतर ही निगरानी और जांच के लिए एक खास उपसमिति (Subcommittee) फिर से बनाने का फैसला हुआ है।

स्मिथ ने इराण में चल रहे संघर्ष का मुद्दा काफी आक्रामक ढंग से उठाया। उन्होंने इसे खुलकर "गैरकानूनी युद्ध" कहा। उनके मुताबिक इस युद्ध के नाम पर अमेरिकी सैनिकों और करदाताओं के पैसे का कैसे इस्तेमाल हो रहा है, इसकी जड़ तक जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने संसद को अंधेरे में रखकर या बिना इजाजत जो भी सैन्य कार्रवाइयां की हैं, वे सब कानूनी जांच के दायरे में आएंगी। ये बातें स्मिथ का राजनीतिक और कानूनी विश्लेषण हैं, लेकिन इनसे आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच बड़े टकराव के आसार दिख रहे हैं।

रक्षा बजट भी स्मिथ के निशाने पर है। अमेरिका की सुरक्षा के नाम पर हर साल 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किया जाता है। स्मिथ ने इतने बड़े बजट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इतने भारी फंड की सचमुच जरूरत है या नहीं, इस पर दोबारा सोचना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के अंदर की अहम कल्याणकारी योजनाओं में कटौती किए बिना सैन्य संसाधनों का सही और बेहतर इस्तेमाल होना चाहिए।

चेतावनी यह भी दी गई है कि सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल, सैन्य खरीद की प्रक्रिया में गड़बड़ियों और निजी रक्षा कंपनियों को दी गई बेवजह आर्थिक मदद की बारीकी से जांच होगी। ट्रंप प्रशासन के दौर में कुछ खास निजी कंपनियों को दिए गए अरबों डॉलर के ठेकों में धोखाधड़ी और राजनीतिक हित जुड़े हैं या नहीं, यह भी खोजा जाएगा।

स्मिथ ने ट्रंप प्रशासन पर सेना के राजनीतिकरण का बहुत गंभीर आरोप लगाया है। कैरिबियन और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी फौज का बिना मंजूरी इस्तेमाल और अमेरिका के अंदरूनी शहरों में सेना की तैनाती जैसे फैसलों पर डेमोक्रेट्स कड़ी नजर रखेंगे। इसके अलावा उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि पेंटागन और सशस्त्र बलों के अहम नागरिक और सैन्य पदों पर अफसरों की काबिलियत के बजाय उनकी "राजनीतिक वफादारी" (Political Loyalty) को तरजीह दी जा रही है। स्मिथ ने यह भी कहा कि सेना की साख बनाए रखने और सैनिकों के रहन-सहन को बेहतर करने के लिए सही नियम-कायदे लागू किए जाएंगे।

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