पुणे में 'अलबत्या गलबत्या २.०' के एक दिन में लगातार सात शो, बना शिखर विश्वविक्रम
बालगंधर्व रंगमंदिर में गुरुवार को एक ही दल के कलाकारों ने सात प्रयोग किए। पुणे नगर निगम के स्कूलों के करीब साढ़े छह हजार बच्चों ने मुफ्त में नाटक देखा।
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बाल नाटक 'अलबत्या गलबत्या २.०' ने मराठी रंगमंच पर नया इतिहास रच दिया। पुणे के बालगंधर्व रंगमंदिर में गुरुवार (तारीख १५) को एक ही दिन में, एक ही टीम के कलाकारों ने लगातार सात शो पेश किए। सुबह सात बजे शुरू हुए ये शो रात सवा ग्यारह बजे तक चले। 'वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक ऑफ इंडिया' ने इसे 'शिखर विश्व रिकॉर्ड' के तौर पर दर्ज किया है।
इस आयोजन की वजह से पुणे नगर निगम के स्कूलों के करीब साढ़े छह हजार विद्यार्थियों को मुफ्त में नाटक देखने का मौका मिला। इनमें से कई बच्चे पहली बार थिएटर के अंदर गए। आयोजकों के मुताबिक यह पहल आम परिवारों के बच्चों तक बाल रंगमंच का आनंद पहुंचाने के मकसद से की गई। बच्चों को इस तरह रंगमंच का अनुभव कराना विद्याधर अनास्कर का संकल्प था, जो इस आयोजन से पूरा हुआ।
नाटक अद्वैत थिएटर की प्रस्तुति है। इसे रत्नाकर मतकरी ने लिखा है और चिन्मय मांडलेकर ने निर्देशित किया है। आयोजन महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक विद्याधर अनास्कर, अद्वैत थिएटर के निर्माता राहुल भंडारे और सर्वस्य प्रोडक्शन की निर्माता श्रद्धा हांडे के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें पुणे नगर निगम का सहयोग भी रहा।
विश्व रिकॉर्ड वाले शो की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज की आरती से हुई। उद्घाटन विद्याधर अनास्कर और उद्यम विकास बैंक की उपाध्यक्षा लीना अनास्कर के हाथों हुआ। दिन भर में सात शो हुए। आखिरी शो रात पौने नौ बजे शुरू होकर सवा ग्यारह बजे खत्म हुआ। इसके बाद 'वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक ऑफ इंडिया' की ओर से पूरी टीम का दर्शकों के सामने सम्मान किया गया।
समारोह में महापौर मंजुषा नागपुरे, उपमहापौर परशुराम वाडेकर, नगर निगम के सांस्कृतिक और खेल विभाग के उपायुक्त डॉ. संतोष टेंगले, बाल रंगमंच परिषद की अध्यक्षा नीला शिर्के, सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश कांबले, सुवर्णा थिटे, संदीप विचारे, डॉ. जयंत शेवतेकर और कृष्णा आराणे समेत कई लोग मौजूद रहे। करीब पचास साल पहले इस नाटक में भूमिका निभाने वाली प्रतिभा मतकरी और उनकी बेटी सुप्रिया विनोद की मौजूदगी खास रही।
पहले शो से आखिरी तक कलाकारों का जोश और ऊर्जा बनी रही। लेखक-निर्देशक प्रवीण तरडे ने पूरी टीम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पहले शो जितनी ही ऊर्जा से लगातार सात शो करना सभी रंगकर्मियों के लिए गर्व की बात है।
विद्या बैंक की ओर से बच्चों को खाने का सामान बांटा गया। साथ ही बैंक के कामकाज और आर्थिक लेनदेन की जानकारी हो, इसलिए उन्हें 'राजू और पैसों का पेड़' किताब भी भेंट की गई।
विश्व रिकॉर्ड के मौके पर बालगंधर्व रंगमंदिर को आकर्षक बिजली की रोशनी से सजाया गया था। प्रवेशद्वार पर रंगोली, गुब्बारों की सजावट, शहनाई के सुर और नाटक के सफर की तस्वीरों से उत्सव जैसा माहौल बन गया था। नाटक की मौज-मस्ती, चुटकुलों और कलाकारों के अभिनय पर बच्चों ने तालियों, सीटियों और हंसी के साथ जवाब दिया।
नाटक में नीलेश गोपनारायण ने चेटकिनी, सनीभूषण मुणगेकर ने अलबत्या गलबत्या और श्रद्धा हांडे ने राजकन्या की भूमिका निभाई। दस कलाकारों की टीम ने सात शो में दर्शकों का मनोरंजन किया। सचिन गोस्वामी, संजय नार्वेकर, विजय पाटकर, सोनाली कुलकर्णी, प्रसाद ओक, संकर्षण कर्हाडे, स्पृहा जोशी, मकरंद अनास्पुरे और नम्रता संभेराव समेत कई कलाकारों ने शुभकामनाएं दीं। आयोजकों ने कहा कि अलग-अलग संस्थाओं, संगठनों और लोगों के सहयोग से यह पहल कामयाब हुई।
लगातार सात शो के इस विश्व रिकॉर्ड के साथ मराठी बाल रंगमंच के सफर में एक और अहम पड़ाव जुड़ गया है। अब 'अलबत्या गलबत्या' के एक हजारवें शो का इंतजार है।