नागपुर के गोरेवाड़ा से दो बाघ पुणे के कात्रज संग्रहालय पहुंचे, बाघों की संख्या अब छह
गोरेवाड़ा वन्यजीव बचाव केंद्र से एक नर और एक मादा बाघ कात्रज के राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय आए हैं। उन्हें पहले तीन से चार हफ्ते अलग रखा जाएगा।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पुणे के कात्रज में राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय में दो नए मेहमान आ गए हैं। नागपुर के गोरेवाड़ा वन्यजीव बचाव केंद्र से एक नर बाघ और एक मादा बाघ गुरुवार, 15 तारीख को पुणे पहुंचे। नर बाघ की उम्र साढ़े चार साल है, जबकि मादा साढ़े तीन साल की है।
इन दोनों बाघों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में बचाया गया था। अब पुणे के संग्रहालय में उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा।
संग्रहालय के संचालक डॉ. राजकुमार जाधव ने बताया कि नए बाघों को तीन से चार हफ्ते तक अलग रखा जाएगा। इसके बाद उनकी सेहत की जांच की जाएगी और फिर उन्हें संग्रहालय के दूसरे बाघों के साथ रखा जाएगा।
इस तबादले की वजह गोरेवाड़ा केंद्र की हालत है। वहां बाघों की संख्या केंद्र की क्षमता से ज्यादा हो गई थी, इसलिए कुछ बाघों को दूसरे प्राणी संग्रहालयों में भेजने का फैसला लिया गया। इसी के तहत नई दिल्ली की केंद्रीय प्राणी संग्रहालय प्राधिकरण (सीजेडए) ने इन दोनों बाघों को पुणे भेजने की मंजूरी दी।
प्रक्रिया के मुताबिक बुधवार, 14 तारीख को शाम पांच बजे जरूरी पशु चिकित्सा जांच और तय कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद दोनों बाघ पुणे से आई टीम को सौंप दिए गए। इस टीम की अगुवाई पशु चिकित्सा अधिकारी घनश्याम मोहन पवार ने की और उन्हीं की टीम दोनों बाघों को पुणे लेकर आई। गुरुवार को दोनों बाघ संग्रहालय में दाखिल हुए।
इन दो बाघों के आने से कात्रज के संग्रहालय में बाघों की कुल संख्या छह हो गई है। नए बाघों के नाम अभी तय नहीं किए गए हैं।
अलग रखने की मियाद पूरी होने के बाद अगर सेहत की जांच के नतीजे ठीक आते हैं, तभी उन्हें बाकी बाघों के साथ छोड़ा जाएगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाए गए इन दोनों बाघों को अब पुणे में रहने के लिए सुरक्षित ठिकाना मिल गया है।