पुणे की सेरिजेन मेडिप्रोडक्ट्स ने रेशीम प्रोटीन वाला 'सेरिओस' बाजार में उतारा, नया प्लांट शुरू
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पुणे की मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी सेरिजेन मेडिप्रोडक्ट्स ने हड्डियों के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया अपना प्रोडक्ट 'सेरिओस' कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बाजार में उतार दिया है। यह प्रोडक्ट रेशीम के प्रोटीन से तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला रेशीम प्रोटीन आधारित बोन व्हॉइड फिलर है, जिसने बड़े पैमाने की मेडिकल ट्रायल पूरी करके जरूरी नियामक मंजूरी हासिल की है।
प्रोडक्ट की कमर्शियल शुरुआत के साथ ही कंपनी ने पुणे में अपने नए प्रोडक्शन सेंटर का उद्घाटन भी किया। यह सेंटर आईएसओ 13485 प्रमाणित है। कंपनी के मुताबिक यहां अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी और सेफ्टी के मानकों का पालन करते हुए रेशीम प्रोटीन पर आधारित मेडिकल उपकरण बनाए जाएंगे।
'सेरिओस' के पीछे की टेक्नोलॉजी की शुरुआत पुणे की सीएसआईआर-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR-NCL) में डॉ. अनूया निसाल की अगुवाई में हुई रिसर्च से हुई है। इस रिसर्च को मेडिकल उपकरणों की शक्ल देने के लिए 2015 में सेरिजेन मेडिप्रोडक्ट्स की स्थापना की गई। बाद में डॉ. स्वाती शुक्ला और डॉ. प्रेमनाथ वेणुगोपालन सह-संस्थापक के तौर पर इस सफर से जुड़े।
कंपनी का इनक्यूबेशन वेंचर सेंटर में हुआ। इसके अलावा बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) से मिले शुरुआती सहयोग से रिसर्च, प्रयोग से पहले की जांच और नियामक मंजूरी की प्रक्रिया को रफ्तार मिली। कंपनी के सह-संस्थापकों का कहना है कि रेशीम प्रोटीन की टेक्नोलॉजी अब रिसर्च से निकलकर असल मेडिकल इस्तेमाल तक पहुंच गई है। एक दशक से ज्यादा चली रिसर्च और ट्रायल के बाद यह प्रोडक्ट बाजार में आया है।
'सेरिओस' को पारंपरिक बोन फिलर्स के विकल्प के तौर पर बनाया गया है। यह प्रोडक्ट इस्तेमाल में आसान है और इसमें रेशीम प्रोटीन के जैविक गुणों को हड्डियों के पुनर्निर्माण के लिए काम में लाने की कोशिश की गई है।
कंपनी की जानकारी के मुताबिक शुरुआती मेडिकल ट्रायल के बाद पुणे के संचेती अस्पताल में मरीजों का फॉलो-अप किया गया। कंपनी ने कहा है कि इस दौरान हड्डियों के पुनर्निर्माण से जुड़े सकारात्मक नतीजे दर्ज किए गए। उसके बाद भारत के अलग-अलग बड़े मेडिकल सेंटरों में मल्टी-सेंटर ट्रायल किए गए। कंपनी के दावे के मुताबिक तुलनात्मक स्टडी में आगे चल रहे कृत्रिम बोन फिलर्स के मुकाबले 'सेरिओस' ने नई हड्डी बनने और हड्डी के ढांचे के पुनर्निर्माण में बेहतर नतीजे दिखाए।
रेशीम को आम तौर पर कपड़े बनाने के लिए जाना जाता है, लेकिन उसके प्रोटीन की खास बनावट की वजह से मेडिकल क्षेत्र में भी उसका इस्तेमाल हो सकता है। सेरिजेन कंपनी भारत की रेशीम उत्पादन क्षमता का फायदा उठाकर हाई-टेक मेडिकल प्रोडक्ट विकसित करने पर जोर दे रही है।
कंपनी के प्रोडक्ट्स में रेशीम प्रोटीन पर आधारित 'सेरिडर्म' भी शामिल है। यह जख्मों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली ड्रेसिंग है, जिसे तीव्र और लंबे समय तक न भरने वाले जख्मों के इलाज में काम में लाया जाता है। इसके अलावा कंपनी कैंसर की सर्जरी के बाद स्तन के ऊतकों के पुनर्निर्माण के लिए भी टेक्नोलॉजी विकसित कर रही है।
कंपनी ने कहा है कि स्वदेशी रिसर्च, प्राकृतिक संसाधनों और आधुनिक टेक्नोलॉजी को जोड़कर वर्ल्ड-क्लास मेडिकल प्रोडक्ट भारत में ही बनाने की दिशा में 'सेरिओस' एक अहम कदम है।