पोशिर धरण के खिलाफ स्थानीय लोगों के साथ खड़े होंगे विधायक थोरवे, शीतकालीन अधिवेशन में उठेगा मुद्दा
विधायक महेंद्र थोरवे ने पोशिर धरण से प्रभावित लोगों को भरोसा दिया कि वे उनकी मांग के साथ हैं और धरण रद्द कराने के लिए शीतकालीन अधिवेशन में मुद्दा उठाएंगे।
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कर्जत तालुका में पोश्री नदी पर बोरगांव के पास प्रस्तावित पोशिर बांध को स्थानीय लोग नहीं चाहते। विधायक महेंद्र थोरवे ने बांध से प्रभावित होने वाले लोगों को खुलकर भरोसा दिया है कि वे स्थानीय लोगों की मांग के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने कहा कि बांध हमेशा के लिए रद्द हो, इसके लिए यह मुद्दा शीतकालीन अधिवेशन में उठाया जाएगा।
बांध में डूबने वाले गांवों के किसान बोरगांव किसान मंडल की अगुवाई में विधायक थोरवे से मिलने पहुंचे थे। इसी मुलाकात में थोरवे ने अपनी भूमिका साफ की।
थोरवे ने कहा कि उनकी भूमिका को लेकर अब तक तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। उनका कहना था कि उनकी भूमिका कायम है और जो लोग कुछ भी बोलते हैं, उनके मुंह पर हाथ नहीं रखा जा सकता। बांध को लेकर मीडिया के जरिए अलग-अलग खबरें फैलाई गईं, ऐसा भी उन्होंने कहा।
जनप्रतिनिधि के तौर पर काम करते हुए उन्होंने देखा है कि फरवरी महीने से बारिश आने तक पानी की किल्लत रहती है। चिल्हार नदी पर जिला परिषद के जरिए सीमेंट के बांध बनाए गए थे, जिनके नीचे से पानी बह जाता था। इसी वजह से चिल्हार और पोश्री, दोनों नदियां सूखी रहती हैं।
थोरवे के मुताबिक सरकार ने 2025 में जाहिर किया कि पोशिर बांध बनेगा। उन्होंने कहा कि इस बांध का काम होने की चर्चा तो उनके जन्म से भी पहले की है। कई अटके हुए सवालों को सुलझाने की कोशिश उन्होंने की है, श्रीराम पुल उसका एक उदाहरण है, और जनता ने उन्हें दूसरी बार चुनकर भेजा है। उन्होंने किसानों से बातचीत में कहा कि छोटे-छोटे बांध बनने चाहिए और जामरंग व कोंढाणे के लिए उनकी कोशिश रहेगी। कोंढाणे का काम 2011 में शुरू हुआ था, उस वक्त राष्ट्रवादी और कांग्रेस के दौर में वहां सिंचाई घोटाला हुआ, और आगे क्या हुआ यह सबने देखा है, ऐसा भी उन्होंने कहा।
थोरवे ने बताया कि कोंढाणे बांध सिडको को सौंपा गया है। तब के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पास पीछा करके उन्होंने कर्जत तालुका के लिए पानी का हिस्सा रिजर्व रखवाने की कोशिश की। विस्थापित होने वाले आदिवासी परिवारों के घर भी सिडको ही बनाए, यह उनकी भूमिका रही।
पानी की किल्लत की वजह से उनका बांध को समर्थन था। तालुका का पानी का सवाल हल होना चाहिए, इसी मकसद से जब बांध की बात आई तो उन्होंने उसका स्वागत किया था, ताकि पानी की किल्लत हमेशा के लिए मिटे। लेकिन अगर पानी मुंबई उपनगर जाने वाला हो, तो इस चुनाव क्षेत्र के विधायक के नाते उन्होंने तीखा विरोध जाहिर किया।
थोरवे ने कहा कि राज्य सरकार ने उनसे कुछ पूछा नहीं और कोई नोटिस भी नहीं दिया, इसलिए वे इस बांध के खिलाफ हैं। स्थानीय लोगों के विरोध की बात सामने आने के बाद यह भी देखना पड़ा कि वहां लोग विस्थापित होंगे, और पुनर्वास का सवाल अब भी अटका हुआ है। उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है, इसलिए उनकी भूमिका यही है कि यह बांध बनने नहीं दिया जाएगा। स्थानीय लोगों की जो भूमिका है, वही उनकी भी रहेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अब तक यह घोषणा नहीं की कि गांव कहां बसाए जाएंगे। इसलिए इस शीतकालीन अधिवेशन में मुद्दा उठाकर मांग रखी जाएगी कि बांध हमेशा के लिए रद्द हो। थोरवे ने यह भी कहा कि पहले जब लोगों ने मोर्चा निकालकर तहसीलदार को निवेदन दिया था, तब अगर वे उनके पास आते तो विरोध और तेज किया जा सकता था। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के सामने भी यह बात लाई जाएगी, ऐसा भरोसा उन्होंने दिया।
आखिर में थोरवे ने कहा कि उनकी भूमिका दोहरी नहीं है। पानी का सवाल गंभीर था, इसलिए उन्होंने वैसी भूमिका ली थी, मगर अब वे स्थानीय लोगों के साथ रहेंगे।