वाशिम में चारे की कमी से निपटने की तैयारी, कलेक्टर कुंभेजकर ने दिए नियोजन के निर्देश
वाशिम जिले में सूखे जैसे हालात को देखते हुए कलेक्टर योगेश कुंभेजकर ने मवेशियों के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने का नियोजन करने को कहा है।
वाशिम जिले में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। ऐसे में मवेशियों के लिए चारे की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए असरदार योजना बनाने के निर्देश जिलाधिकारी योगेश कुंभेजकर ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि रबी सीजन में चारे का उत्पादन बढ़ाया जाए, चारा बीज बांटे जाएं और वन क्षेत्र में चारे की खेती की जाए। जरूरत पड़ने पर चारा डिपो और चारा छावनियों के जरिए जानवरों तक चारा पहुंचाने को भी पहली प्राथमिकता देने को कहा गया।
जिला चारा किल्लत योजना समीक्षा बैठक में कुंभेजकर यह बात कह रहे थे। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्पित चौहान, अपर जिलाधिकारी ब्रिजेश पाटील, निवासी उप जिलाधिकारी विश्वनाथ घुगे, सहायक वन संरक्षक मंठावार, जिला पशुसंवर्धन उपायुक्त डॉ. तुषार बावणे और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शाहू भगत मुख्य रूप से मौजूद थे।
बैठक में बताया गया कि रबी सीजन में चारे का उत्पादन बढ़ाने के लिए चारा बीज उपलब्ध कराने हेतु 1 करोड़ रुपये के अतिरिक्त फंड की मांग की गई है। विदर्भ-मराठवाड़ा दुग्धविकास परियोजना से 20 लाख रुपये के चारा बीज बांटने का प्रस्ताव है। सिंचाई की जमीन और पर्याप्त पानी वाले 644 किसानों की सूची तैयार की जा चुकी है।
चालू साल 2026-27 में 51.7 लाख रुपये का फंड मिल चुका है। इससे 1 हजार 814 लाभार्थियों को 13 हजार 448 किलो चारा बीज बांटे गए हैं। इसके जरिए 725 हेक्टेयर क्षेत्र में चारे की खेती और 24 हजार 664 मेट्रिक टन चारा उत्पादन की उम्मीद है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि रबी सीजन में चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए मौजूद योजनाओं का असरदार इस्तेमाल किया जाए, और वन क्षेत्र में चारे की खेती पर ज्यादा जोर दिया जाए। ई-क्लास जमीन पर व्कीबी-जी रामजी योजना के तहत चारे की खेती के लिए पशुसंवर्धन विभाग प्रस्ताव पेश करे। वन विभाग ने कहा है कि चरागाह क्षेत्र का चारा पशुसंवर्धन विभाग के जरिए जानवरों को उपलब्ध कराया जाएगा।
कम बारिश में उगने वाली ज्वार और बाजरा जैसी चारा फसलों की खेती, भूसे का सही भंडारण और प्रोसेसिंग, और चारा साक्षरता अभियान 2026 चलाने पर भी जोर दिया जा रहा है। जरूरत के मुताबिक चारा डिपो और छावनियों के जरिए पशुधन को चारा देने की योजना बनाई गई है।
कुंभेजकर ने बताया कि जिला पशुसंवर्धन उपायुक्त की ओर से पेश योजना के मुताबिक 21वीं पशुगणना में जिले में 2 लाख 91 हजार 895 पशुधन दर्ज है। सितंबर 2026 के अंत तक जिले में 13 लाख 29 हजार 138 मेट्रिक टन चारा उपलब्ध है। यह भंडार अप्रैल से मई महीने तक चलेगा, ऐसी योजना है। उन्होंने कहा कि चारे की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जो भी जरूरी उपाय हैं, उनकी योजना बनाई जाए।