कर्जत में 15 सितंबर से बारिश गायब, हजारों हेक्टेयर में धान की फसल संकट में
कर्जत तालुका में 15 सितंबर के बाद पानी नहीं गिरा, खेतों का पानी घट रहा है और किसान दुष्काल घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
धान की खेती के लिए जाने जाने वाले कर्जत तालुका पर अब सूखे का साया मंडरा रहा है। 15 सितंबर से बारिश ने बिल्कुल दगा दे दिया है। इससे खेतों में पानी कम हो गया है और धान की फसल मुश्किल में आ गई है। कई जगह अभी तक धान के अंकुर बाहर नहीं निकले हैं, इसलिए किसानों को यही फिक्र खाए जा रही है कि फसल हाथ में आएगी भी या नहीं।
कर्जत तालुका पहले बड़े पैमाने पर धान की खेती के लिए मशहूर था। एक वक्त था जब तालुके में करीब 25 से 27 हजार हेक्टेयर में धान लगाया जाता था। फिर फार्म हाउस और सेकंड होम के लिए बड़ी तादाद में जमीनें बिक गईं और धान का रकबा घटता चला गया। अब यह रकबा दस हजार हेक्टेयर से भी कम रह गया है। बताया जा रहा है कि इस साल तो मुश्किल से छह हजार हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हुई है।
इस साल जून में ठीक से बारिश नहीं हुई। जून के आखिर में बारिश शुरू हुई और सितंबर के बीच तक अच्छी बरसी। तीन हजार मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज होने के बावजूद शुरुआत में हुई देरी से धान की रोपाई का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया। आम तौर पर जुलाई के बीच तक रोपाई पूरी हो जाती है, लेकिन इस बार अगस्त तक रोपाई चलती रही। नतीजा यह हुआ कि फसल तैयार होने में देर हो गई।
हर साल सितंबर के आखिर तक खेतों में धान का पीला सोना लहलहाता दिखता है। इस बार अक्टूबर शुरू हो गया, फिर भी कई खेतों की फसल तैयार नहीं हुई है। ऊपर से 15 सितंबर के बाद जरूरी बारिश नहीं हुई, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। कुछ इलाकों में आंधी के साथ बारिश हुई, पर खेती को उससे उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं मिला। किसानों का कहना है कि धान पकने के लिए लगातार और काफी बारिश चाहिए। खेतों का पानी घटने से पैदावार पर बड़ा असर पड़ने का डर जताया जा रहा है।
इसी वजह से कर्जत तालुका में दुष्काल घोषित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। नेरल विविध विकास कार्यकारी सोसायटी के किसान सदस्यों ने सालाना आम सभा में दुष्काल घोषित करने की मांग रखी है। कई किसानों ने कर्जत के तहसीलदार से मिलकर भी प्रशासन के सामने यही मांग रखी है।
फिलहाल कई इलाकों में धान के खेत ऊपर से हरे-भरे दिख रहे हैं। फिर भी किसान चिंता जता रहे हैं कि पानी की कमी से फसल के भरपूर पनपने की गुंजाइश कम है। इसलिए आने वाले कुछ दिनों में बारिश न हुई तो कर्जत तालुका के धान उगाने वाले किसानों को भारी नुकसान होने का डर है।