चाफेवाडी आश्रमशाला की इमारत में कच्ची ईंटें, समिति अध्यक्ष ने उठाए सवाल
कर्जत तालुका की सरकारी आदिवासी आश्रमशाला के निर्माण पर स्कूल व्यवस्थापन समिति अध्यक्ष प्रदीप गोरे ने घटिया काम का आरोप लगाया है।
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रायगड जिले के कर्जत तालुका में चाफेवाडी की सरकारी आदिवासी आश्रमशाला की नई इमारतों और हॉस्टल का काम चल रहा है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रदीप गोरे ने इस काम पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका आरोप है कि काम घटिया दर्जे का है। हॉस्टल की इमारत में जो मिट्टी की ईंटें लग रही हैं, वे कच्ची हैं और हाथ में लेते ही टूट जाती हैं।
खास बात यह है कि ये इमारतें रायगड जिले के लोक निर्माण विभाग की तरफ से नहीं बनाई जा रहीं। काम की जिम्मेदारी ठाणे जिले के निर्माण विभाग के पास है। इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि इन कामों पर नियंत्रण आखिर किसका है।
कर्जत तालुका आदिवासी तालुका के तौर पर जाना जाता है। यहां आदिवासी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाने के लिए सरकार आदिवासी विकास विभाग के जरिए सरकारी आश्रमशालाएं चलाती है। तालुका में चाफेवाडी, भालीवडी, पिंगलस और पाथरज में ऐसी आश्रमशालाएं हैं। चाफेवाडी की आश्रमशाला की इमारत और हॉस्टल का काम मंजूर कराने के लिए कर्जत के विधायक महेंद्र थोरवे ने सरकार के दरबार में कोशिश की थी। इसके बाद तीन मंजिला स्कूल इमारत के लिए छह करोड़ रुपये और हॉस्टल इमारत के लिए सवा आठ करोड़ रुपये मंजूर हुए।
दोनों इमारतों के लिए करीब 15 करोड़ रुपये का फंड मंजूर है। काम ठाणे जिले के ठेकेदार कर रहे हैं। ठेकेदारों के साथ-साथ काम की देखरेख की जिम्मेदारी भी ठाणे जिले के निर्माण विभाग को दी गई है। सवाल यह है कि कर्जत तालुका में लोक निर्माण विभाग का उप-विभागीय दफ्तर होते हुए भी यहां की सरकारी आश्रमशाला के काम की जिम्मेदारी ठाणे जिले के विभाग के पास कैसे गई।
बताया गया है कि रायगड जिले के कर्जत की आश्रमशाला की इमारत का जिम्मा ठाणे जिले के अफसरों को दिए जाने से ही वहां घटिया काम चल रहा है। सवाल यह भी है कि ठाणे से अफसर कर्जत कैसे आएंगे। अफसर आश्रमशाला में मुआयना करने आते ही नहीं, इसलिए हॉस्टल और स्कूल इमारत का काम घटिया दर्जे का हो रहा है। गोरे के मुताबिक वहां निर्माण के लिए लाई गई ईंटें हाथ से गिरते ही टूट जाती हैं।
हॉस्टल इमारत के पोर्च का काम भी चल रहा है। वहां गहरा गड्ढा है और रात के अंधेरे में कोई बच्चा उसमें गिर गया तो हड्डियां टूटे बिना नहीं रहेंगी। इसलिए सवाल खड़ा किया गया है कि ऐसे काम की योजना बनाने वाले लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने आखिर कैसी योजना बनाई है।
आश्रमशाला में पढ़ने वाले बच्चे आदिवासी हैं। अभिभावकों ने पूछा है कि घटिया दर्जे का काम हुआ और आगे चलकर इमारत गिर गई तो क्या होगा। कहा जा रहा है कि इस घटिया काम की वजह से भविष्य में इमारत गिरी तो आदिवासी समाज के बच्चों की जान जा सकती है।
प्रदीप गोरे ने बताया कि कर्जत तालुका की आदिवासी आश्रमशालाओं के निर्माण का मुआयना ठाणे जिले के अफसर करते हैं। उनकी गुजारिश है कि हमारे विधायक ऐसे खराब कामों को रोकने के लिए तुरंत ध्यान दें।