कर्जत में 800 एकड़ पर अदानी समूह के पावर हब की चर्चा, जमीन खरीद तेज
कर्जत तालुका में अदानी समूह के पावर हब की चर्चा के बीच जमीन खरीद तेज हुई है और किसानों ने भाव बढ़ा दिए हैं।
देश के बड़े कारोबारी समूहों में गिने जाने वाले अदानी समूह की कर्जत में 'पावर हब' खड़ा करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए कर्जत तालुका में जमीनें खरीदने की होड़ लगी है। चर्चा है कि करीब 800 एकड़ जमीन पर यह प्रोजेक्ट बनेगा। इसी चर्चा के चलते बोरिवली परिसर में जमीन के भाव बढ़ गए हैं। मुंबई पास होने की वजह से कर्जत तालुका की अहमियत भी काफी बढ़ गई है।
कर्जत तालुका पहले 'फार्म हाउसेस' का तालुका कहलाता था। पिछले 2-4 साल से वह रहिवासी संकुलों का तालुका बनता दिख रहा था। अब वह अपनी 'कृषि प्रधान तालुका' की पहचान खो बैठा है। फार्म हाउसेस और सेकंड होम की वजह से यह 'डेस्टिनेशन कर्जत' बन गया था। टाटा, गोदरेज, लोढा, कोटक और व्हिडिओकॉन जैसी बड़ी बांधकाम कंपनियों ने भी यहां अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं।
उपनगरीय रेलवे से जुड़े इस तालुका में अब बड़े पैमाने पर बांध और बिजली प्रोजेक्ट आने वाले हैं। टाटा समूह ने 100 साल पहले यहां बिजली प्रोजेक्ट शुरू किया था। अब कई कंपनियां कर्जत में बिजली प्रोजेक्ट लगाने को उत्सुक दिख रही हैं। टाटा समूह का दूसरा बिजली प्रोजेक्ट उसी की अतिरिक्त जमीन पर बन रहा है। रोज हजारों मेगावॉट बिजली बनाने का लक्ष्य रखने वाली टोरंट कंपनी के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने पायघड़े बिछाए हैं। अब इसमें देश के अग्रणी उद्योग समूह अदानी का नाम भी जुड़ गया है।
अदानी की तरफ से कशेले परिसर में जमीन की खरीद चल रही है। उस इलाके में पुणे की एक बांधकाम कंपनी की 300 एकड़ एकसंघ जमीन खरीदी जा चुकी है। साथ ही चोरिवली, सुगवे, धारेवाडी और रामाचीवाडी की जमीनों पर भी नजर गई है। स्थानीय किसानों को भनक लगी है कि वहां करीब 800 एकड़ पर अदानी समूह बिजली प्रोजेक्ट लगाएगा। इसी वजह से स्थानीय किसानों ने जमीन के भाव बढ़ा दिए हैं।
हजारों एकड़ जमीन बांधकाम व्यावसायिक कंपनियों के पास है। कर्जत तालुका में किसी तरह की औद्योगिक वसाहत नहीं है। इसलिए यहां फार्म हाउसेस, सोसायटियां और अब रिसॉर्ट की कतार खड़ी हो गई है। ज्यादातर रिसॉर्ट स्थानीय किसानों ने ही बनाए हैं और इससे पर्यटन का धंधा फल-फूल रहा है। लेकिन बांध और बिजली प्रोजेक्ट तालुका का जनजीवन बिगाड़ सकते हैं।
अदानी जैसे बड़े समूह के लिए किसानों की जमीनें दिलाने को बड़े एजंट सक्रिय हो गए हैं। इसलिए अब खुलकर कहा जाने लगा है कि अदानी समूह के प्रोजेक्ट की चर्चा सच है। यह भी चर्चा है कि अदानी समूह की तरफ से मुंबई के राजनीतिक लोग किसानों के पास आ रहे हैं।