कैडर में जाने से पहले ट्रेनी IPS अफसर गृह मंत्रालय से जुड़ेंगे, अधिकारियों के मुताबिक पहली बार
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78वें रेगुलर रिक्रूट बैच के 151 ट्रेनी अफसरों को प्रोबेशन के लिए कैडर भेजे जाने से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है।
आईपीएस के नए ट्रेनी अफसरों को अपने-अपने कैडर में प्रोबेशन और उसके बाद पोस्टिंग के लिए भेजे जाने से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने बुधवार को कहा कि ऐसा पहली बार किया जा रहा है।
अधिकारियों की जानकारी के मुताबिक 78वें रेगुलर रिक्रूट बैच में कुल 151 ट्रेनी अफसर हैं। इनमें पड़ोसी देशों के 16 विदेशी अफसर भी शामिल हैं। इस बैच ने हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में पहले चरण की ट्रेनिंग पूरी की है। सूत्रों के मुताबिक 2025 के इस बैच को गृह मंत्रालय से जोड़ने के लिए गुरुवार को विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम रखा जाएगा।
इस बैच की पासिंग आउट परेड 17 अक्टूबर को हुई थी। दीक्षांत परेड को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह सचिव ने उसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संदेश पढ़कर सुनाया था। उस संदेश में आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त न करने के रुख, समय पर कार्रवाई और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया था।
गृह मंत्रालय ने 2023 में आईपीएस ट्रेनिंग की जो गाइडलाइंस जारी की थीं, उनके मुताबिक अकादमी की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अफसरों को उनके अलॉट किए गए राज्य में आगे की ट्रेनिंग दी जाती है। इस ट्रेनिंग की अवधि केंद्र सरकार संबंधित राज्य सरकार से बात करके तय करती है।
नए इंतजाम से आईपीएस अफसरों के पारंपरिक ट्रेनिंग क्रम में बदलाव हुआ है। लेकिन ट्रेनी आईपीएस अफसरों को पहले गृह मंत्रालय से जोड़ने का सही मकसद क्या है और इससे उन्हें क्या फायदा होगा, यह अधिकारियों ने अभी तक साफ नहीं किया है।
पासिंग आउट परेड हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में 17 अक्टूबर को हुई थी। यह आईपीएस के 78वें रेगुलर रिक्रूट बैच (2025) की परेड थी। इसमें भारत के 135 नए अफसरों के साथ नेपाल, भूटान और मालदीव के 16 विदेशी अफसर भी शामिल हुए थे।
परेड के बाद नए आईपीएस अफसरों की मार्चिंग के स्तर को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे थे। कई लोगों ने परेड के दौरान कुछ आईपीएस प्रोबेशनर्स के हाथों की स्विंग में हुई गलती पर आलोचना की। कुछ ने इसे कम अनुशासन से जोड़ा, तो कुछ ने कहा कि मार्चिंग टुकड़ी में जोश, होश और तालमेल की कमी दिखी।
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