फडणवीस: फलबाग वाले सूखा प्रभावित इलाकों में 15 दिसंबर तक बोरवेल खुदाई की छूट, आम पाबंदी बरकरार
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि जहां किसानों की फलबागें हैं, वहां 15 दिसंबर तक बोरवेल खोदने की मोहलत दी गई है। सब जगह पाबंदी हटाई नहीं जाएगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में बताया कि सूखे से जिन इलाकों में किसानों की फलबागों को भारी नुकसान हुआ है, वहां बोरवेल की खुदाई के लिए 15 दिसंबर तक की मोहलत दी गई है। उनके मुताबिक आम पाबंदी पहले की तरह कायम रहेगी।
फडणवीस ने कहा कि जहां फलबागें हैं, वहां अगर अभी उन्हें नहीं बचाया गया तो बहुत नुकसान होगा, क्योंकि पेड़ पर फल आने में दस-बारह साल लग जाते हैं। इसी वजह से जिन इलाकों में कुछ समय के लिए पाबंदी हटाना मुमकिन है, वहां बोरवेल खोदने पर लगी रोक उठाई जाएगी। उन्होंने साफ किया कि पूरी तरह से, यानी हर जगह के लिए, रोक नहीं हटेगी। जहां किसानों की फलबागें हैं, वहां 15 दिसंबर तक खुदाई की इजाज़त रहेगी। उन्होंने कहा कि मई महीने तक पानी पहुंचाना है और बागों को बचाना है, इसलिए यह इजाज़त खास मामले के तौर पर दी गई है।
फडणवीस के मुताबिक फ्लशिंग पर कोई रोक नहीं है। रोक सिर्फ गहरा करने पर है और उसके लिए इजाज़त लेनी पड़ेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कल रात उन्होंने किसानों से बात की और आज तालुका के सरपंचों को बुलाकर उनसे चर्चा की। गांव के सवाल, सड़क, खेती और तालाबों के मसले सामने हैं। उनमें से कई मसले हल होने लायक हैं और कुछ की योजनाएं पहले ही घोषित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सारे निवेदन मिल गए हैं और उन पर कार्रवाई होगी। कुछ अच्छे सुझाव भी आए हैं और उन्हें लागू करने की कोशिश की जाएगी। फडणवीस ने कहा कि किसानों और नागरिकों ने बड़ी तड़प के साथ अपने सवाल रखे और सबकी बात सुनी गई। सबके सवाल सुलझाने के लिए वे कोशिश करते रहेंगे।
फडणवीस ने रामभाऊ बालपांडे और अरुणाताई बालपांडे का आभार माना। उनके मुताबिक परिवार ने स्वागत किया, खाना खिलाया और अच्छा नाश्ता कराया, जिससे बहुत अपनापन बन गया। परिवार की पोती नारायणी से भी दोस्ती हो गई। फडणवीस ने कहा कि यह किसान परिवार है, जिस पर इस बार सूखे का बहुत असर पड़ा है। संतरे के बाग, कपास और सोयाबीन पर असर हुआ है। परिवार में कुल तीन खाताधारक हैं और तीनों को कर्जमाफी का फायदा मिला है। परिवार ने संतोष जताया और उनमें लड़ने का हौसला दिखा। फडणवीस ने बताया कि यह पूरा परिवार तीर्थयात्रा में जाता है और बहुत भक्ति वाला है। विट्ठल को मानने वाले ऐसे किसान कैसी भी मुश्किल हो, उसका सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि उनसे आत्मविश्वास मिला, बहुत कुछ सीखने को मिला और वहां रहकर अच्छा लगा।
प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए फडणवीस ने कहा कि उन्होंने उनकी तारीफ की। उनके मुताबिक मोदीजी महिलाओं, किसानों और दिव्यांगों जैसे वर्गों के साथ बड़े अपनेपन से पेश आते हैं और उनके सवालों को पहले उठाते हैं। फडणवीस ने कहा कि उनके बर्ताव से ही यह सब करने की प्रेरणा मिलती है।
सिंचाई पर फडणवीस ने कहा कि अटके हुए सिंचाई प्रोजेक्ट में से 97 पूरे किए जा चुके हैं और बचे हुए प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दे दी गई है। जहां आखिरी काम बाकी है, उसके लिए 15000 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे। उनके मुताबिक इससे विदर्भ और मराठवाड़ा के छोटे-छोटे प्रोजेक्ट को बड़ा फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि विदर्भ और महाराष्ट्र में राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के भजन आत्मबल देने वाले हैं और चेतना जगाते हैं। तुकडोजी महाराज के भजनों से दिखता है कि भजन के जरिए समाज को कैसे बदला जा सकता है। जय गुरुदेव सेवा मंडल की जितनी शाखाएं हैं, उनमें सभी लोग भक्ति में डूब गए। फडणवीस के मुताबिक यही असली आध्यात्मिक ताकत है, जो मुश्किल हालात में किसानों को बल देती है।
फडणवीस ने बताया कि जंगल के पास के किसानों को गौर और भैंसों से परेशानी है और दूसरे जानवरों का भी उपद्रव दिखता है। सोलर बाड़ की योजना लाई गई थी, लेकिन वह कम पड़ रही है और उसका दायरा बढ़ाना पड़ेगा। जंगल के बाहर सोलर बाड़ लगाई जा सकती है या नहीं, इस पर विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि सोलर बाड़ की व्यवस्था लागू करनी होगी।
सूखे के बारे में फडणवीस ने कहा कि उस पर हमेशा के लिए जीत पानी है तो एक तरफ जल संरक्षण के काम करने होंगे और दूसरी तरफ नदी जोड़ प्रोजेक्ट करना होगा। वैनगंगा-नलगंगा प्रोजेक्ट से विदर्भ की दस हजार एकड़ जमीन सिंचाई के दायरे में आएगी। इसी तरह मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र के लिए नदी जोड़ प्रोजेक्ट किया जा रहा है। उनके मुताबिक जहां हमेशा सूखा पड़ता है, वहां इससे सूखे पर स्थायी जीत मिल सकेगी।


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