लोहारी सावंगा की महिलाओं ने मुख्यमंत्री फडणवीस से कहा, फसल को दाम और जानवरों से हिफाज़त दीजिए
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दिवाली के दिन नागपुर के लोहारी सावंगा गांव पहुंचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने महिला किसानों ने उचित दाम और वन्य प्राणियों से बचाव की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने कई घोषणाएं कीं।
दिवाली के दिन नागपुर के लोहारी सावंगा (Lohari Sawanga) गांव ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मेहमाननवाज़ी की। गांव वालों के प्यार का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने गांव के कई अटके हुए सरकारी विकास कामों को रफ्तार देने का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री के गांव में रहते हुए प्रशासन की ओर से गांव के दस किसानों को सिंचाई के कुएं मंजूर किए गए। गांव के स्टोरेज तालाब के लिए 2 करोड़ 43 लाख रुपये का फंड मंजूर करके जल्द काम शुरू करने का फैसला भी बताया गया।
इस मौके पर गांव की महिला किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री के उनके गांव आने से उन्हें बहुत खुशी हुई है। उनका कहना था कि सरकार सिर्फ किसानों को सक्षम बनाए और इसके लिए गारंटीशुदा भाव दे। ऐसा हुआ तो उन्हें किसी और मुफ्त लाभ वाली योजना की ज़रूरत नहीं रहेगी। महिलाओं के मुताबिक अगर उनकी उपज को सही दाम मिले और खेती को जंगली जानवरों से हिफाज़त मिले, तो उन्हें लाडकी बहिन योजना भी नहीं चाहिए और सूखे के लिए अग्रिम मदद भी नहीं, वे खुद सक्षम होकर आगे बढ़ जाएंगी।
जल जीवन मिशन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके कई कामों के लिए पैसे नहीं आए हैं। जिन मंजूर कामों में 75 प्रतिशत से ज़्यादा काम हो चुका है, उन्हें तुरंत प्राथमिकता देकर उन इलाकों में फौरन पानी पहुंचाने का तय किया गया है। अगले दौर में 50 प्रतिशत से ज़्यादा पूरे हो चुके जल जीवन मिशन के कामों को हाथ में लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए तार की बाड़ लगाना ज़रूरी है। कई किसानों ने यह समस्या बताई है और इस पर ठोस काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के जिन गांवों में तालाबों और दूसरे जल स्रोतों में पानी घट गया है, वहां गहरा करके गाद निकालने का काम शुरू होना चाहिए। इसके लिए गहरीकरण और ढुलाई का खर्च सरकार दे रही है। सूखे के इस दौर में जो ग्राम पंचायत आगे बढ़कर किसानों की मदद करेगी, उसकी मदद सरकार करेगी, ऐसा वादा भी मुख्यमंत्री ने किसानों से किया।
बातचीत के दौरान एक बुज़ुर्ग किसान ने बताया कि नरखेड़ और काटोल तहसील की खेती को जंगली जानवरों, खासकर नीलगाय और सूअरों से बहुत नुकसान है। उनके मुताबिक दोनों जानवर बड़ी तादाद में बच्चे देते हैं और ज़हर देने पर भी नहीं मरते। इस किसान ने सीधी मांग रखी कि इन्हें मार दिया जाए।
गांव की महिला सरपंच ने कहा कि उनके गांव में दो अलग-अलग पार्टियों के नेता हैं। दोनों अलग-अलग काम बताते हैं और उनकी वजह से कोई काम ठीक से नहीं हो पाता। उन्होंने दोनों नेताओं को काबू में रखने की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे दोनों नेताओं के बीच एक पुल बांध देंगे, यानी दोनों को मिल-जुलकर चलने के लिए कहेंगे।
मुख्यमंत्री ने एक अहम घोषणा भी की। राज्य में पानी की किल्लत को देखते हुए बोरवेल खुदाई पर जो रोक लगाई गई थी, उसे सिर्फ खेती के बोरवेल के लिए 15 दिसंबर तक हटाया जा रहा है।


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