शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

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03:10 IST

फडणवीस का पुणे में भाजपा नेताओं को संदेश: पद काम के दम पर मिलेगा, नज़दीकी से नहीं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में भाजपा नेताओं से कहा कि पद पाने से पहले अपना योगदान दिखाना होगा।

फडणवीस का पुणे में भाजपा नेताओं को संदेश: पद काम के दम पर मिलेगा, नज़दीकी से नहीं तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में भाजपा नेताओं को जो चेतावनी दी, उसका असर सिर्फ इस शहर तक सीमित नहीं माना जा रहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि पार्टी में पद लॉबिंग या वरिष्ठ नेताओं से नज़दीकी के बल पर नहीं, बल्कि काम के बल पर मिलने चाहिए। इससे महाराष्ट्र भर में भाजपा संगठन से जवाबदेही की उम्मीद का संकेत मिलता है।

बताया गया है कि 14 अक्टूबर को पुणे में पार्टी नेताओं की बैठक हुई। उसमें फडणवीस ने पदों के पीछे भागने पर नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को संगठन या सरकार में कोई पद मांगने से पहले यह दिखाना होगा कि उन्होंने क्या योगदान दिया है।

बैठक भले ही पुणे की थी, पर यही सिद्धांत नागपुर, मुंबई, नाशिक, छत्रपति संभाजीनगर और दूसरे जिलों के भाजपा नेताओं पर भी लागू होता है।

राजनीतिक संगठनों में पदों के लिए होड़ आम बात है। लेकिन जब पद की दौड़ ज़मीनी काम, मतदाताओं तक पहुंच और संगठन की जिम्मेदारियों पर भारी पड़ने लगे, तो पार्टी और उसके समर्थकों के बीच का रिश्ता कमज़ोर हो सकता है। फडणवीस ने प्रदर्शन के आकलन और जवाबदेही पर जो ज़ोर दिया, वह इसी चुनौती की तरफ इशारा करता है। उनके रुख का मतलब यह है कि पद अपने आप में इनाम नहीं है, वह एक जिम्मेदारी है, जिसमें दिखने वाला काम और नतीजे चाहिए।

बताया जा रहा है कि एक प्रस्ताव यह भी है कि विधायकों, पार्षदों और पदाधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाए और उसके बाद ही उन्हें पद के लिए विचार में लिया जाए। अगर इसे लगातार लागू किया गया, तो यह पता चल सकता है कि कौन नेता ज़मीन पर सक्रिय हैं और कौन सिर्फ असरदार पद हासिल करने पर ध्यान दे रहे हैं। इस तरह की व्यवस्था की कामयाबी इस पर टिकी होगी कि प्रदर्शन को कैसे नापा जाता है और क्या सभी जिलों और स्तरों पर एक जैसे पैमाने अपनाए जाते हैं।

इस संदेश में एक व्यावहारिक पहलू भी जुड़ा है। आने वाले स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनावों के लिए मतदाता पंजीकरण को लेकर चिंता जताई गई है। चुनाव की तैयारी सिर्फ बैठकों और आश्वासनों से नहीं होती। उसके लिए लगातार फील्ड में काम करना, स्थानीय इकाइयों के बीच तालमेल बिठाना और पात्र मतदाताओं तक कार्यकर्ताओं का पहुंचना ज़रूरी है।

अब देखना यह है कि क्या यह संदेश पूरे राज्य में प्रदर्शन के आधार पर आकलन की व्यवस्था में बदलता है। इसका असर इसी से तय होगा कि इस चेतावनी के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं।

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