परभणी में 52 ऐतिहासिक धरोहर स्थलों की प्रदर्शनी, संभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने किया उद्घाटन
संभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने परभणी में ऐतिहासिक धरोहर कार्यशाला का दौरा किया और जिले के 52 स्थलों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
परभणी, 17 अक्टूबर: छत्रपति संभाजीनगर संभाग के संभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने 15 और 16 अक्टूबर 2026 को परभणी के जिलाधिकारी कार्यालय में हुई ऐतिहासिक धरोहर कार्यशाला का दौरा किया। उन्होंने कार्यशाला की गतिविधियों की जानकारी ली।
इसी मौके पर जिला प्रशासन की तरफ से तैयार की गई एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी उनके हाथों हुआ। इस प्रदर्शनी में जिले के कुल 52 ऐतिहासिक धरोहर स्थलों की जानकारी इकट्ठा करके रखी गई है। सारी जानकारी एक ही जगह मिल जाए, यह इसका मकसद है।
कार्यशाला के आयोजन के पीछे कई उद्देश्य बताए गए हैं। परभणी जिले को समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत मिली है। जिले की ऐतिहासिक इमारतों, पुरातात्त्विक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहर की अहमियत आम नागरिकों तक पहुंचाना, इन स्थलों को सहेजना और उनका संवर्धन करना, और पर्यटन के जरिए जिले के विकास को रफ्तार देना, इन्हीं मकसदों से कार्यशाला रखी गई थी।
बताया गया कि प्रदर्शनी से जिले के ऐतिहासिक वैभव की पहचान बनेगी और इन स्थलों की पर्यटन क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले प्रशिक्षणार्थियों को संभागीय आयुक्त श्रीकांत के हाथों प्रतीकात्मक रूप से प्रमाणपत्र बांटे गए। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों की तारीफ की। उन्होंने ऐतिहासिक धरोहर के अध्ययन, उसके दस्तावेजीकरण, संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐसे कार्यक्रमों की अहमियत को रेखांकित किया।
बताया गया कि इस कार्यशाला से ऐतिहासिक धरोहर स्थलों का अध्ययन करने वाले अध्ययनकर्ता, शोधकर्ता और विद्यार्थियों को प्रोत्साहन मिलेगा। पर्यटन क्षेत्र में काम करना चाहने वालों को भी इससे हौसला मिलेगा। जिले के ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर अहम जगह दिलाने में यह पहल महत्त्वपूर्ण साबित होगी।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी संजयसिंह चव्हाण, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नतिषा माथुर और पुलिस अधीक्षक पंकज कुमावत मौजूद थे। पुरातत्त्व विभाग, छत्रपति संभाजीनगर के सहायक निदेशक अनिल गोटे, अपर जिलाधिकारी शोभा जाधव, निवासी उपजिलाधिकारी अनुराधा ढालकरी और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी पवन खंडके भी हाजिर थे। इनके अलावा संबंधित अधिकारी, अध्ययनकर्ता और प्रशिक्षणार्थी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
जिले की ऐतिहासिक विरासत को सहेजकर और पर्यटन के जरिए उसे व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन का यह कदम अहम माना जा रहा है।