इराक में महिलाएं छेड़छाड़ के खिलाफ मोबाइल कैमरे से उठा रहीं आवाज
इराक में महिलाएं सड़क पर छेड़छाड़ और बदसलूकी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल रही हैं। धमकियों के बावजूद मुहिम जारी रखने के संकेत हैं।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
इराक में महिलाएं यौन उत्पीड़न और अत्याचार के खिलाफ एक अलग ही तरीके से लड़ाई लड़ रही हैं। सड़क पर छेड़छाड़ करने वाले, अश्लील टिप्पणी करने वाले और बदसलूकी करने वाले रोड रोमियो को टोकना हो, तो महिलाएं झट से अपना मोबाइल निकालती हैं और उसका वीडियो बनाने लगती हैं।
कैमरा देखते ही ऐसे लोगों की हालत खराब हो जाती है और वे वहां से भाग खड़े होते हैं। इसके बाद इराक की महिलाएं बनाया हुआ वह वीडियो सोशल मीडिया पर फैला देती हैं।
इस मुहिम के जरिए महिलाओं ने अपनी बात रखने के लिए नया मंच और नया रास्ता चुना है। एक इलाके की सारी महिलाएं एक ही वीडियो एक साथ शेयर करती हैं, इसलिए वह कम वक्त में सबके पास पहुंच जाता है। लेकिन इसी बीच महिलाओं को धमकियां भी मिल रही हैं। फिर भी बताया जा रहा है कि उन्होंने मुहिम जारी रखने के संकेत दिए हैं।
इराक की महिला अधिकार कार्यकर्ता सारा जासिम सोशल मीडिया के जरिए यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों के वीडियो बनाकर वे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर डालती हैं। इन वीडियो को बड़ी संख्या में लोग देख रहे हैं और इराक में इन पर चर्चा होने लगी है।
कई पीड़ित महिलाएं अपने अनुभव सारा तक पहुंचा रही हैं। इन वीडियो से आरोपियों की बदसलूकी समाज के सामने लाने की कोशिश हो रही है। कैमरे में कैद वीडियो अदालती कार्रवाई में भी सबूत बन सकते हैं, और आरोपियों से सामाजिक स्तर पर जवाब मांगने में भी मदद मिल रही है। भारत में शायद यह बात इतनी बड़ी न लगे, लेकिन इराक जैसे मुस्लिम धार्मिक देश में इसका महत्व है। कहा जा रहा है कि वहां की सामाजिक बनावट के लिए यह मुहिम अनुकूल है।
मुहिम का असर दिखने भी लगा है। सारा जासिम ने बताया है कि एक वीडियो में स्कूल जाने वाली लड़कियों को परेशान करने वाले एक पुलिस कर्मचारी की कथित बदसलूकी सामने आई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। हालांकि इसके बदले सारा को बड़ा खतरा भी उठाना पड़ रहा है।
उन्हें जान से मारने की धमकी वाले फोन और मैसेज आ रहे हैं। तेजाब हमले की धमकियां भी मिल रही हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि समाज में अब भी यह सोच है कि महिलाओं को अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठानी चाहिए। अपनी सुरक्षा के लिए सारा को सार्वजनिक जगहों पर जाना सीमित करना पड़ा है और वे बहुत संभलकर निकलती हैं।
इराक में महिलाओं पर अत्याचार करने वाले आरोपी को कड़ी सजा मिले, ऐसे कानून की जरूरत अब बताई जा रही है। महिला अधिकार कार्यकर्ता मौजूदा दंड संहिता की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि उसमें इसे साफ तौर पर अपराध ठहराने का प्रावधान नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया के भरोसे रहने के बजाय अब समाज और प्रशासन से जुड़े लोगों की मदद जरूरी है। फिलहाल माहौल महिलाओं के पक्ष में बनता दिख रहा है और कहा जा रहा है कि यह उनके लिए फायदेमंद है।