मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में गूगल अर्थ से मिला 850 फुट का गोल गड्ढा, निकला उल्कापिंड का क्रेटर

ऑस्ट्रेलियन भूगर्भशास्त्री आर्थर हिकमन ने गूगल अर्थ पर सैटेलाइट तस्वीरें देखते हुए पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में 850 फुट व्यास का गोल निशान पकड़ा, जो उल्कापिंड के टकराने से बना क्रेटर निकला।

पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में गूगल अर्थ से मिला 850 फुट का गोल गड्ढा, निकला उल्कापिंड का क्रेटर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

आज इंटरनेट की मदद से घर बैठे दुनिया का कोना-कोना देखा जा सकता है। लेकिन कंप्यूटर स्क्रीन पर चल रही एक साधारण तलाश से अंतरिक्ष का इतना बड़ा राज खुल जाएगा, यह शायद किसी ने सोचा नहीं होगा। ऑस्ट्रेलियन भूगर्भशास्त्री आर्थर हिकमन (Arthur Hickman) हमेशा की तरह गूगल अर्थ पर सैटेलाइट से ली गई तस्वीरें देख रहे थे। तभी पश्चिम ऑस्ट्रेलिया के बेहद दूरदराज इलाके ऑप्थाल्मिया रेंज (Ophthalmics Range) में उन्हें जमीन पर एक अजीब बनावट दिखी। यह करीब 850 फुट (260 मीटर) व्यास का एक पूरा और सटीक गोला था।

यह इलाका इंसानी बस्ती से सैकड़ों मील दूर, सूखा और वीरान है। इतना बड़ा और सटीक गोल गड्ढा इंसान का बनाया हुआ होना लगभग नामुमकिन था। इसलिए हिकमन की दिलचस्पी बढ़ी और उन्होंने उस जगह की जानकारी और सैटेलाइट की पुरानी तस्वीरें फौरन वरिष्ठ अधिकारियों और भूवैज्ञानिक संस्थाओं को भेज दीं।

हिकमन के बताने के बाद वरिष्ठ वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों की एक खास रिसर्च टीम पश्चिम ऑस्ट्रेलिया की उस दूरदराज जगह पहुंची। वहां का नजारा देखकर सब हैरान रह गए, क्योंकि वहां सचमुच एक विशाल क्रेटर मौजूद था। शुरुआती अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने ऐलान किया कि यह इंसान की बनाई रचना नहीं है। यह अंतरिक्ष से आए एक बड़े उल्कापिंड की टक्कर से बना क्रेटर है। खोज करने वाले वैज्ञानिक के योगदान के सम्मान में इस क्रेटर को अनौपचारिक तौर पर 'हिकमन क्रेटर' (Hickman Crater) नाम दिया गया।

'ऑस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ अर्थ सायंसेस' में छपे शोधपत्र और 'ऑस्ट्रेलियन जिओग्राफिक' की रिपोर्ट के मुताबिक यह ऑस्ट्रेलिया में खोजा गया सबसे नया उल्कापिंड क्रेटर (Newest Meteorite Crater) है। दुनिया के दूसरे विशाल क्रेटरों के मुकाबले हिकमन क्रेटर का आकार छोटा माना जाता है, फिर भी इसके बनने के पीछे अंतरिक्ष की एक बेहद तेज और तबाही मचाने वाली घटना थी।

वैज्ञानिक ग्लिक्सन, हिकमन और विकर्स ने इस क्रेटर पर गहरी रिसर्च की। उनके मुताबिक यह क्रेटर आज से करीब 10,000 से 1,00,000 साल पहले, यानी लेट प्लेस्टोसीन (Late Pleistocene) दौर में बना होगा। अंतरिक्ष से करीब 10 मीटर चौड़ा, लोहे या चट्टान का एक बहुत तेज रफ्तार उल्कापिंड सीधे पृथ्वी के वातावरण में घुसा और यहां आकर गिरा।

टक्कर इतनी भयानक थी कि 10 मीटर के इस उल्कापिंड ने जमीन पर गिरते ही करीब 80 मीटर गहरा गड्ढा खोद दिया और आसपास की ज्वालामुखी चट्टानें पूरी तरह टूटकर उड़ गईं। इस जोरदार टक्कर की रुकावट से क्रेटर के दक्षिणी किनारे के पास बहने वाली एक छोटी नदी का बहाव भी बदल गया था। नदी के इसी भूवैज्ञानिक अध्ययन से वैज्ञानिक क्रेटर की उम्र का अंदाजा लगा पाए।

यह क्रेटर सचमुच उल्कापिंड की टक्कर से बना है या किसी और भूवैज्ञानिक वजह से, इसकी पक्की पुष्टि के लिए 2012 में एक बड़ा वैज्ञानिक प्रोजेक्ट चलाया गया। ऑस्ट्रेलियाई खान, उद्योग नियमन और सुरक्षा विभाग (DMIRS) के तहत आने वाले 'जिओलॉजिकल सर्वे ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया' ने 'एटलस आयरन' संस्था के साथ मिलकर हिकमन क्रेटर में ड्रिलिंग की। वैज्ञानिक पी. डब्ल्यू. हेन्स ने इसके नतीजों पर 'कोलैबोरेटिव साइंटिफिक ड्रिलिंग एट हिकमन क्रेटर' नाम की एक चर्चित रिसर्च रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक क्रेटर के बीचोबीच सीधी दिशा में 64.7 मीटर गहरी ड्रिलिंग की गई थी।

ड्रिल कोर से साफ हुआ कि ऊपर के 48.4 मीटर में वह गाद और मिट्टी थी, जो क्रेटर बनने के बाद हजारों साल में जमा हुई। लेकिन 55.1 से 64.7 मीटर की गहराई के बीच वैज्ञानिकों को 'रायोलाइट' (Rhyolite) नाम की मूल चट्टान मिली, जो बुरी तरह चटकी हुई थी और भारी दबाव से टूटी थी। चट्टान का इस तरह चटकना सिर्फ तेज रफ्तार से टकराने वाले उल्कापिंड की जबरदस्त शॉकवेव (Impact Shockwaves) से ही मुमकिन है। इस ड्रिलिंग जांच ने साबित कर दिया कि हिकमन क्रेटर 100 फीसदी उल्कापात से ही बना है। गूगल अर्थ जैसे आम डिजिटल साधन से अंतरिक्ष के एक पुराने राज का इस तरह खुलना खगोल विज्ञान और भूगर्भ के अध्ययन की बेहद हैरान करने वाली घटना माना जाता है।

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