ग्राफीन से पकड़ में आएंगे प्रकाश के सूक्ष्म बदलाव, आईआईटी मुंबई का नया शोध
आईआईटी मुंबई के शोधकर्ताओं ने ग्राफीन के जरिए प्रकाश में होने वाले बेहद छोटे क्वांटम बदलावों को पकड़ने का सैद्धांतिक रास्ता सुझाया है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
किसी कमरे के तापमान में हुआ जरा सा फर्क हो या किसी मशीन के बिजली प्रवाह में आया उतार-चढ़ाव, इन्हें ठीक-ठीक नापना अक्सर मुश्किल होता है। प्रकाश के मामले में भी यही दिक्कत है। रोशनी में बहुत छोटे स्तर पर जो बदलाव होते हैं, उन्हें सीधे पहचानना आसान नहीं है।
अब सवाल यह है कि अगर इन बदलावों से पैदा होने वाली रोशनी का अध्ययन करके असली बदलावों की जानकारी निकाली जा सके, तो क्या होगा? आईआईटी मुंबई के शोधकर्ताओं ने इसी के लिए एक नया सैद्धांतिक रास्ता पेश किया है। इस शोध में ग्राफीन नाम के खास पदार्थ का इस्तेमाल करके प्रकाश के सूक्ष्म क्वांटम बदलावों का पता लगाने की संभावना दिखाई गई है।
यह शोध आईआईटी मुंबई के भौतिकशास्त्र विभाग के कार्तिक प्रभू और प्रा. गोपाल दीक्षित ने किया है। उनका अध्ययन अमेरिकन फिजिकल सोसायटी की पत्रिका फिजिकल रिव्ह्यू लेटर्स में प्रकाशित हुआ है।
अब देखें कि शोध में असल में क्या हुआ। प्रकाश में भी बहुत बारीक अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव होते हैं, जिन्हें क्वांटम उतार-चढ़ाव कहा जाता है। आम उपकरण इन्हें आसानी से नहीं पकड़ पाते। शोधकर्ताओं ने एक खास किस्म की क्वांटम रोशनी ग्राफीन पर डाली और देखा कि उससे ज्यादा आवृत्ति वाली रोशनी कैसे पैदा होती है। उन्होंने सैद्धांतिक विश्लेषण से दिखाया कि इस नई बनी रोशनी में मूल प्रकाश के सूक्ष्म बदलावों के संकेत मिल सकते हैं।
इस शोध की अहमियत यह है कि आगे चलकर बहुत छोटे बदलावों को ज्यादा सटीकता से नापने वाली सेंसर प्रणाली बनाने में इसका उपयोग हो सकता है। ऐसी तकनीक से वैज्ञानिक प्रयोगों में प्रकाश के बारीक गुणों को समझना, इलेक्ट्रॉन की बेहद तेज हलचल का अध्ययन करना और पदार्थों में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं पर नजर रखना ज्यादा असरदार हो सकता है। परमाणु घड़ियों, क्वांटम तकनीक और बेहद संवेदनशील मापन प्रणालियों के शोध को भी आने वाले समय में इसका फायदा मिलने की संभावना है।
हालांकि इस शोध से यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि मेडिकल जांचें या रोजमर्रा के उपकरण फौरन ज्यादा सटीक हो जाएंगे। फिलहाल यह सिर्फ सैद्धांतिक अध्ययन है। असली प्रयोगों में इसकी पुष्टि और तकनीक के विकसित होने के लिए आगे और शोध की जरूरत है। फिर भी प्रकाश के अदृश्य सूक्ष्म बदलावों को नापने की दिशा में यह अध्ययन एक अहम कदम साबित हो सकता है।