नवरात्रि के लिए मैदान नहीं मिला, प्रताप सरनाईक बोले: हिंदुओं के त्योहार से परहेज क्यों
मीरा-भाईंदर में नवरात्रि उत्सव के लिए ध्यानचंद मैदान न मिलने पर परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने नगर निगम से सवाल किया।
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मीरा-भाईंदर : मीरा-भाईंदर में नवरात्र उत्सव के लिए मैदान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने आरोप लगाया है कि नगर निगम ने पद्मभूषण मेजर ध्यानचंद मैदान किराए पर देने से मना कर दिया। सरनाईक के मुताबिक हर साल की तरह इस बार भी नवरात्र उत्सव के लिए यह मैदान मांगा गया था, लेकिन नगर निगम ने महासभा का प्रस्ताव होने की वजह बताकर इनकार कर दिया।
सरनाईक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगर निगम प्रशासन और सत्ताधारियों पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया, "किराया भरकर नगर निगम के मैदान लेते हैं, फिर हिंदुओं के त्योहार का विरोध क्यों?"
सरनाईक ने दावा किया कि महासभा के प्रस्ताव से एक दिन पहले ही मैदान की बुकिंग हो चुकी थी। उनके मुताबिक साल भर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए नगर निगम आयुक्त से कुछ मैदान मांगे गए थे, और उनमें से एक मैदान दिया भी गया है।
उन्होंने कहा, "हम नगर निगम के मैदान किराया देकर लेते हैं और नगर निगम को निधि भी देते हैं। फिर नागरिकों की भावनाओं से क्यों खेला जा रहा है? खुद को हिंदुत्ववादी कहने वाले सत्ताधारी अगर हिंदुओं के त्योहारों में ही रुकावट डालेंगे, तो इस पर सोचना पड़ेगा।"
सरनाईक ने यह आरोप भी लगाया कि विपक्ष के सदस्यों, कार्यकर्ताओं और नेताओं को कार्यक्रम के लिए मैदान या नगर निगम की सुविधाएं लेते समय परमिशन के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं। उनकी मांग है कि सत्ताधारी और विपक्ष में फर्क किए बिना सबके लिए एक जैसे नियम हों और सबके साथ एक जैसा बर्ताव हो।
मैदानों के इस्तेमाल की नगर निगम की नीति पर पहले भी सत्ताधारियों और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप हो चुके हैं। धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मैदान के इस्तेमाल पर पाबंदी की बात उठी थी, तब नवरात्र उत्सव और दही हांडी जैसे सार्वजनिक आयोजनों का मुद्दा चर्चा में आया था। दूसरी तरफ बताया गया है कि प्रशासन की भूमिका यह है कि मैदान खेल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हों और बड़े आयोजनों से मैदानों को नुकसान न पहुंचे।
सरनाईक ने बताया कि इस साल नवरात्र उत्सव को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि सूखा प्रभावित किसानों की मदद में लगाया जाएगा। उनके मुताबिक किसान परिवारों को जरूरी सामान, अनाज, मेडिकल मदद और दूसरी जरूरी चीजें देने के लिए वे निजी स्तर पर 8 से 10 करोड़ रुपये खर्च करने का इरादा रखते हैं।
उन्होंने दावा किया कि पिछले साल धाराशिव जिले के भूम और परंडा इलाके के 101 किसान परिवारों को गायें बांटी गई थीं। सरनाईक ने कहा कि किसान परिवारों की आमदनी का जरिया बने, इस मकसद से करीब सवा करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की गई।
नवरात्र उत्सव स्थल पर मुख्यमंत्री सहायता निधि की जानकारी देने वाला स्टॉल लगाया जाएगा। जो नागरिक आर्थिक मदद करना चाहें, उनसे सीधे मुख्यमंत्री सहायता निधि के जरिए मदद करने की अपील की जाएगी। अनाज, मेडिकल किट, साइकिल या दूसरी काम की चीजों के रूप में मदद देने वालों के लिए जिलाधिकारी से जरूरी परमिशन मांगी गई है। यह भी बताया गया कि मदद लेते वक्त पारदर्शिता रखी जाएगी और कोई गलतफहमी न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा।
आयोजकों ने बताया कि इस बार नवरात्र उत्सव और गरबा कार्यक्रम पूरी तरह मुफ्त रहेगा और नागरिकों से कोई एंट्री फीस नहीं ली जाएगी। एंट्री के लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है। अपील की गई कि नवरात्र उत्सव आम जनता का उत्सव है, लोग बड़ी संख्या में आकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लें और सूखा प्रभावित किसानों की मदद में भी योगदान दें।
सरनाईक ने बताया कि मैदान की परमिशन का सवाल अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है और इस मामले में राज्य सरकार को पत्र भेजा गया है। अब मीरा-भाईंदर के राजनीतिक हलकों की नजर इस पर है कि नगर निगम प्रशासन मैदान को लेकर आगे क्या फैसला लेता है।