नाशिक में राष्ट्रपति मुर्मू के सामने गोदावरी की महाआरती, साढ़े छह हजार ग्रामीणों ने बनाया विश्वविक्रम
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सिंहस्थ कुंभमेला के आगाज़ पर शनिवार को रामतीर्थ और गोदाघाट पर जनजातीय सिंहस्थ महाआरती हुई, जिसमें आदिवासी पाड़ों के करीब साढ़े छह हजार ग्रामीण शामिल हुए।
सिंहस्थ कुंभमेला पर्व की शुरुआत के मौके पर शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को नाशिक के रामतीर्थ और गोदाघाट इलाके में भव्य जनजातीय सिंहस्थ महाआरती हुई। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य रूप से मौजूद थीं। नाशिक जिले की आदिवासी बस्तियों से आए करीब साढ़े छह हजार ग्रामीणों ने एक साथ गोदावरी की महाआरती की और इसी के साथ विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
दिन की शुरुआत दोपहर 12 बजकर दो मिनट पर नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में ध्वजारोहण समारोह से हुई। सिंहस्थ महाकुंभ का यह ध्वजारोहण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों हुआ। इसके बाद दोपहर चार बजे महाआरती का असली कार्यक्रम शुरू हुआ।
महाआरती और शंखनाद का आयोजन अनंता विजय शंखनाद संस्था, रामतीर्थ गोदावरी सेवा समिति और पुरोहित संघ ने मिलकर किया था। हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी से गोदावरी का किनारा भक्ति के माहौल में गूंज उठा।
इस आरती के लिए तैयारी काफी पहले से चल रही थी। आदिवासी बस्तियों के साढ़े छह हजार ग्रामीण अनुशासन के साथ आरती कर सकें, इसके लिए उन्हें पहले से खास ट्रेनिंग दी गई थी। दोपहर एक बजे महाआरती का ड्राई रन करके सारी तैयारी परखी गई। फिर शाम चार बजे हजारों ज्योतियां जलाकर असली महाआरती की गई।
इससे पहले 3 हजार 800 महिलाओं के आरती करने का विदेशी रिकॉर्ड था। वह रिकॉर्ड अब पीछे छूट गया है। शाम को राष्ट्रपति की मौजूदगी में एक बार फिर महाआरती हुई। इस समारोह से नाशिक की धार्मिक और सांस्कृतिक शान में इज़ाफ़ा हुआ है और सिंहस्थ कुंभमेला पर्व की शुरुआत तेजोमय और भक्ति भरे माहौल में हुई है। सुरक्षा इंतज़ाम और भीड़ के प्रबंधन के लिए प्रशासन ने जो मेहनत की, वह कामयाब रही और पूरे देश से इस कार्यक्रम की तारीफ हो रही है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री क्षेत्र त्र्यंबकेश्वर में त्र्यंबकेश्वर मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा की और दर्शन किए। इस मौके पर राज्यपाल डॉ. जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार और विपणन और प्रोटोकॉल मंत्री जयकुमार रावल वगैरह मौजूद थे। पूजा पुरोहित गिरीश जोशी ने कराई। दर्शन के बाद मंदिर संस्थान की ओर से राष्ट्रपति को मंदिर की प्रतिकृति भेंट की गई।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।