सिंहस्थ कुंभमेले की शुरुआत, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों ध्वजारोहण
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त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ध्वज फहराया। एक दिन पहले नाणीजधाम की गांव परिक्रमा में 126 दल शामिल हुए।
नाशिक : सिंहस्थ कुंभमेले की शुरुआत माने जा रहे ध्वजारोहण समारोह को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने हाथों से पूरा किया। त्र्यंबकेश्वर में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने ध्वज फहराया।
इससे एक दिन पहले, यानी शुक्रवार को पूर्वसंध्या पर, जगद्गुरू रामानंदाचार्य दक्षिणपीठ, नाणीजधाम की तरफ से भव्य सिंहस्थ ग्राम परिक्रमा शुरू हुई। सिंहस्थ कुंभमेले की पृष्ठभूमि में निकली यह यात्रा उत्साह भरे माहौल में शुरू हुई। शहर के मुख्य रास्तों से होकर यह यात्रा करीब चार घंटे चली और नाशिक के लोगों ने जी भरकर इसका नज़ारा देखा।
महाध्वजारोहण समारोह की पृष्ठभूमि में आयोजित इस ग्राम परिक्रमा में पूरे 126 दल शामिल थे। महाराष्ट्र के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को दिखाने वाली झांकियां परिक्रमा का खास आकर्षण रहीं।
परिक्रमा में कई संत-महंतों के रथ भी शामिल थे, जिनसे यात्रा को धार्मिक रंग मिला। इनमें जगद्गुरू श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज, धर्मसम्राट ज्ञानदासजी महाराज, पंच निर्मोही अनी आखाड़ा के श्रीमहंत राजेंद्र दासजी महाराज और श्री पंच निर्वाणी अनी आखाड़ा के श्री महंत मुरलीदासजी के रथ थे। श्री पंच दिगंबर और आखाड़ा के श्रीमंत वैष्णव दास जी महाराज, श्रीमंत माधव दाजी महाराज और खाकी आखाड़ा के श्रीमंत मोहनदास जी महाराज के रथ भी साथ चले। इनके अलावा और भी कई संत-महंतों के रथ यात्रा में थे।
वैदिक मंत्रघोष, वारकरी भजन, संत परंपरा की झांकियां, रामपंचायतन और अमृतकुंभ रथ की वजह से पूरा माहौल और भी भक्तिमय हो गया।
कई मान्यवरों की मौजूदगी
त्र्यंबकेश्वर में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों हुआ। नाशिक में होने वाले कार्यक्रम के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार समेत राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों के पहुंचने की बात कही गई है।
जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति दोपहर तीन बजे त्र्यंबकेश्वर आएंगी। वे श्री त्र्यंबकेश्वर के दर्शन करेंगी और कुशावर्त का जायज़ा लेंगी। यह जानकारी फिलहाल दी जा रही है।
नाणीजधाम की ग्राम परिक्रमा के साथ सिंहस्थ कुंभमेले के धार्मिक पर्व का माहौल शहर में बन गया है। यह परिक्रमा महाध्वजारोहण समारोह की पृष्ठभूमि में आयोजित हुई थी। इसमें संत-महंतों के रथ, भजन और मंत्रघोष के साथ 126 दलों की मौजूदगी रही।
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