साखर करीब 30 फीसदी महंगी, अनाज से लेकर दूध और चिकन तक बढ़ रहे दाम
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कम बारिश और एल निनो की मार खेती पर पड़ी है। जानकारों के मुताबिक अनाज की महंगाई से जल्द राहत मुश्किल है और अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच यह करीब 10 फीसदी तक जा सकती है।
आने वाले महीनों में आम आदमी की जेब पर महंगाई का बोझ और बढ़ने वाला है। सब्जी और अनाज के दाम पहले से चढ़ रहे हैं, और अब दूध, अंडे और चिकन जैसी रोज की जरूरत की चीजें भी महंगी होती जा रही हैं। ऐसे में घर का रोजाना का खर्च चलाते वक्त लोगों को काफी सोच-समझकर हाथ खोलना पड़ेगा।
इस साल प्राकृतिक आपदा, कम बारिश और एल निनो की मार खेती पर सीधी पड़ी है। खेती पर पड़ने वाला असर सीधे महंगाई से जुड़ा होता है, इसलिए अनाज की सप्लाई तक हर चीज पर दबाव बढ़ गया है। जानकारों का कहना है कि अनाज की महंगाई से तुरंत राहत मिलना अब मुश्किल होगा।
आंकड़ों की बात करें तो सितंबर में खुदरा अनाज महंगाई बढ़कर 7.74 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि कुल खुदरा महंगाई 5.54 फीसदी रही। जानकारों के मुताबिक अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच अनाज की महंगाई करीब 10 फीसदी तक जा सकती है। बढ़ती महंगाई का दबाव भारतीय रिझर्व बैंक पर भी आ सकता है। जानकारों का अनुमान है कि दामों को काबू में रखने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 50 से 75 बेसिस पॉइंट की और बढ़ोतरी कर सकता है।
देश के कई हिस्सों में बारिश औसत से कम हुई, जिसका असर अब रबी सीजन की बुवाई पर दिख रहा है। महाराष्ट्र समेत दक्षिण और पश्चिम भारत के कई इलाकों में किसानों को खेतों में पूरी नमी नहीं मिल रही और सिंचाई के पानी की भी कमी है। इससे फसलों को नुकसान हुआ है। हालत यह है कि किसान को पैदावार तो दूर, साल भर के लिए अपने खाने भर का अनाज जुटाना भी कठिन हो गया है। इसी वजह से देश की सालभर की अनाज की जरूरत पूरी करने लायक स्टॉक मौजूद नहीं है।
इस मौसम का असर गेहूं और चने जैसी फसलों की बुवाई पर पड़ सकता है। अगर पैदावार उम्मीद से कम रही तो बाजार में माल की उपलब्धता घटेगी, और इससे दामों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा चीनी, दालें, चावल और प्याज के दाम भी चढ़ रहे हैं।
देश में चीनी का उत्पादन लगातार दूसरे साल घरेलू मांग से कम रहने की संभावना है। पिछले एक साल में चीनी के दाम करीब 30 फीसदी बढ़ चुके हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन चीनी के आयात की शुल्क मुक्त इजाजत दी है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़े दाम, रुपये की गिरती कीमत और महंगे माल भाड़े की वजह से आयात और महंगा पड़ रहा है। नतीजा यह कि आने वाले महीनों में अनाज की महंगाई सर्दियों की फसलों की कटाई और बारिश की मात्रा पर निर्भर करेगी।
अनाज की महंगाई का असर अब प्रोटीन वाली चीजों पर भी दिख रहा है। पशुओं के चारे का बढ़ता खर्च, ढुलाई, पैकेजिंग और ऊर्जा की लागत का बोझ डेयरी और मुर्गीपालन उद्योग पर पड़ा है। मुर्गीपालन में इस्तेमाल होने वाले मक्का और सोयाबीन जैसे चारे का खर्च कुल उत्पादन लागत का 60 से 70 फीसदी होता है। इसी वजह से चिकन और अंडों के दाम भी बढ़ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक जनवरी 2027 से चिकन के भाव में और बढ़ोतरी हो सकती है।
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