नांदेड में ग्रामीण इलाके के 200 होनहार बच्चों को मिलेगी NEET, JEE और MHT-CET की मुफ्त तैयारी
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नांदेड जिला प्रशासन ने गांव के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 200 गुणवान विद्यार्थियों को NEET, JEE और MHT-CET की मुफ्त कोचिंग देने का फैसला किया है। चयन के लिए प्रवेश परीक्षा दिसंबर में होगी।
महाराष्ट्र के नांदेड जिले में प्रशासन ने गांव के होनहार और जरूरतमंद बच्चों के लिए एक अच्छी पहल की है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सूखे के हालात हैं और पैसों की तंगी भी है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने ग्रामीण परिवारों के 200 होनहार विद्यार्थियों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग देने का फैसला किया है।
इस पहल के तहत पात्र बच्चों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं, यानी NEET, JEE और MHT-CET, की मुफ्त और व्यवस्थित तैयारी कराई जाएगी। प्रशासन का मुख्य मकसद यह है कि पैसों की दिक्कत या कमजोर आर्थिक हालत की वजह से कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा ऊंची पढ़ाई से दूर न रह जाए।
अब सवाल यह कि इसका फायदा किसे मिलेगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए कुछ शर्तें तय की हैं। यह योजना खास तौर पर गांव के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए है। इसके अलावा ग्रामीण इलाके की जिला परिषद के स्कूलों, हाईस्कूलों और सरकार से अनुदान पाने वाले निजी स्कूलों में इस वक्त 10वीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थी ही इसके लिए पात्र होंगे। इस खास कार्यक्रम के लिए कुल 200 होनहार विद्यार्थी चुने जाएंगे।
जिला प्रशासन की जारी की गई सूचना के मुताबिक कोचिंग में दाखिले के लिए बच्चों का चयन एक प्रवेश परीक्षा के जरिए होगा। यह चयन परीक्षा दिसंबर महीने में होगी। जो विद्यार्थी यह परीक्षा पास करेंगे, उनमें से चुने गए 200 बच्चों को अनुभवी शिक्षक मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरे प्रोग्राम्स की तैयारी कराएंगे। प्रशासन ने गांव के सभी पात्र विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इस मौके का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाएं।
इस कदम को अहम क्यों माना जा रहा है, यह भी समझ लीजिए। आम तौर पर खाते-पीते परिवारों के बच्चे इन मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए लाखों रुपये की फीस भरकर बड़े कोचिंग इंस्टिट्यूट्स में जाते हैं। दूसरी तरफ गांव और गरीब परिवारों के बच्चे पैसों की कमी से इस होड़ में पीछे रह जाते हैं। नांदेड जिला सूखे की मार झेल रहा है और ऐसे में प्रशासन ने यह पहल ग्रामीण बच्चों को बराबरी का मौका देने के लिए शुरू की है, ताकि वे देश के टॉप टेक्निकल और मेडिकल इंस्टिट्यूट्स में दाखिला पा सकें।
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