महाराष्ट्र में कक्षा 6 की नई किताबें आईं, इतिहास से हटा वर्णव्यवस्था वाला हिस्सा
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राष्ट्रीय शैक्षणिक नीति 2020 के तहत बालभारती ने इसी सत्र से कक्षा 6 की इतिहास, भूगोल और विज्ञान की नई किताबें जारी की हैं।
राज्य की स्कूली किताबों में राष्ट्रीय शैक्षणिक नीति 2020 के तहत बड़े बदलाव किए गए हैं। राज्य के पाठ्यपुस्तक मंडल 'बालभारती' ने इसी शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 की इतिहास, भूगोल और विज्ञान की नई किताबें पेश की हैं। इन किताबों में प्राचीन भारतीय ज्ञानग्रंथों, वैज्ञानिकों और ऐतिहासिक विद्वानों को खास जगह दी गई है। साथ ही इतिहास के कुछ सामाजिक और राजनीतिक हिस्सों को नए ढंग से रखा गया है। एनसीईआरटी (NCERT) की तर्ज पर हुए इन बदलावों में मुख्य रूप से तीन दिशाओं और इतिहास के कुछ हिस्सों में बदलाव पर काम हुआ है।
विज्ञान की नई किताबों में आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों के साथ प्राचीन भारतीय विद्वानों का योगदान भी शामिल किया गया है। 'फोर्स एंड प्रेशर' (Force and Pressure) नाम के पाठ में गुरुत्वाकर्षण की बात करते हुए आइजैक न्यूटन के साथ भास्कराचार्य 2 का भी जिक्र है। किताब के मुताबिक भास्कराचार्य 2 ने करीब 950 साल पहले अपने ग्रंथ 'सिद्धांत शिरोमणि' में बताया था कि पृथ्वी चीजों को अपनी ओर खींचती है। 'बियॉन्ड द स्काय' पाठ में एक खास बॉक्स के जरिए बताया गया है कि आर्यभट्ट पहले व्यक्ति थे जिन्होंने समझाया कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।
इसके अलावा महर्षि चरक को आयुर्वेद का संस्थापक मानते हुए सजीवों के वर्गीकरण में उनका योगदान जोड़ा गया है। अंतरिक्ष शोध में भारत की उपलब्धियां दिखाने के लिए चंद्रयान-1, मंगलयान, चंद्रयान-3, आदित्य एल-1 और निसार उपग्रह शामिल किए गए हैं। 'वेदर वुमन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर मौसम वैज्ञानिक अन्ना मणि और पर्यावरण बचाने के 'चिपको आंदोलन' में गौरा देवी का योगदान भी नई किताबों में है।
भूगोल की नई किताब में भारतीय भौगोलिक इतिहास को जगह मिली है। भारतीय भूगोल के इतिहास पर बने एक नए सेक्शन में वेद, पुराण, उपनिषद और सूर्य सिद्धांत का हवाला दिया गया है। इसमें पृथ्वी को 'सप्तद्वीप' बताते हुए ब्रह्मांड की उत्पत्ति के वैदिक विचारों की तुलना 'बिग बैंग सिद्धांत' से की गई है।
पहले की किताबों में सिर्फ ग्रीनविच मध्यरेखा का जिक्र था। अब नई किताब में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्रियों ने उज्जैन को पृथ्वी का केंद्रबिंदु माना था और पहली बार मूल रेखांश (Base Longitude) की अवधारणा दी थी।
इतिहास की किताब में प्राचीन चिकित्साशास्त्र, प्रमुख ऐतिहासिक हस्तियों और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों के वर्णन में बदलाव हुए हैं। 'फादर ऑफ सर्जरी' माने जाने वाले सुश्रुत की नाक पुनर्रचना (Nose Reconstruction) तकनीक और 'सुश्रुत संहिता' ग्रंथ का विस्तार से जिक्र है। चाणक्य का 'अर्थशास्त्र' और चंद्रगुप्त मौर्य के उत्थान में उनकी भूमिका भी विस्तार से जोड़ी गई है।
पहले की किताबों में वर्णव्यवस्था और जातीय विषमता के विकास का विस्तार से ब्योरा था। उत्तर वैदिक काल में यज्ञ के विधि-विधान और पुरोहित वर्ग के विशेषाधिकारों वाला वह अनुच्छेद हटा दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि सामाजिक स्थान जन्म पर आधारित होता है। उसकी जगह अब वैदिक मूल्यों, नैतिक कर्तव्यों और प्रकृति पूजा पर जोर दिया गया है।
वर्धमान महावीर और गौतम बुद्ध की शिक्षाएं बनी रखी गई हैं। लेकिन ईसा पूर्व छठी सदी में नए धर्मों के उदय को जातीय भेदभाव और सामाजिक हालात से जोड़ने वाला पुराना अनुच्छेद हटाकर उसे भारत की 'धार्मिक विविधता' के तौर पर रखा गया है। इसके अलावा हड़प्पा संस्कृति के पतन के कारणों से 'विदेशी टोलियों का आक्रमण' वाला मुद्दा पूरी तरह हटा दिया गया है। अब इस पतन के लिए नदी के प्रवाह में बदलाव, प्राकृतिक आपदाएं और सुमेरियन संस्कृति के साथ व्यापार में गिरावट को ही कारण बताया गया है।
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