इंजीनियरिंग का सपना: जेईई मेन और एडवांस्ड में क्या फर्क है, कितनी बार दे सकते हैं
जेईई मेन 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। जानिए दोनों परीक्षाओं का फर्क, अटेम्प्ट की गिनती और पैटर्न।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
देश के ज़्यादातर स्टूडेंट्स का सपना इंजीनियर बनने का होता है। इसके लिए हर साल लाखों बच्चे संयुक्त प्रवेश परीक्षा यानी जेईई (JEE) की तैयारी करते हैं और एग्ज़ाम देते हैं। इस परीक्षा के दो चरण होते हैं: जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड।
हाल ही में जेईई मेन 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ है। स्टूडेंट्स 22 नवंबर 2026 तक जेईई मेन 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। ज़्यादातर पैरेंट्स को यह उलझन रहती है कि जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड में असल में फर्क क्या है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि ये परीक्षाएं कितनी बार दी जा सकती हैं। दोनों अलग-अलग परीक्षाएं हैं और इनका सिलेबस और एग्ज़ाम पैटर्न भी अलग है।
जेईई मेन और जेईई एडवांस्ड, दोनों राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं हैं। दोनों के ज़रिए इंजीनियरिंग कोर्स में एडमिशन मिलता है। दोनों देश की मुश्किल परीक्षाओं में गिनी जाती हैं, लेकिन इनकी पात्रता शर्तें, पैटर्न और सिलेबस जुदा हैं।
जेईई मेन यानी संयुक्त प्रवेश परीक्षा मुख्य। इसे राष्ट्रीय परीक्षा संस्था करवाती है। जेईई मेन से NIT, IIIT और दूसरे जुड़े संस्थानों के BE/BTech कोर्स में एडमिशन मिलता है। यह जेईई एडवांस्ड की पात्रता परीक्षा भी है। जेईई मेन साल में दो सत्रों में होती है, जनवरी और अप्रैल में। स्टूडेंट दोनों में बैठ सकते हैं और जिसमें ज़्यादा मार्क्स हों, उसके आधार पर रैंक बनती है। अप्रैल सत्र के नतीजे के बाद फाइनल रैंक जारी की जाती है।
स्टूडेंट किसी एक या दोनों सत्रों में शामिल हो सकते हैं। मौजूदा नियमों के मुताबिक 12वीं पास करने के बाद उम्मीदवार लगातार तीन साल जेईई मेन दे सकते हैं। यानी 12वीं में रहते हुए और उसके बाद के लगातार दो सालों में यह परीक्षा दी जा सकती है, और हर साल ज़्यादा से ज़्यादा दो सत्रों में बैठा जा सकता है।
जेईई मेन तीन घंटे की कंप्यूटर आधारित परीक्षा होती है। इसमें गणित, फिजिक्स (Physics) और केमिस्ट्री (Chemistry) के सवाल पूछे जाते हैं। इनमें बहुविकल्पीय सवाल (MCQs) और न्यूमेरिकल यानी संख्या वाले सवाल होते हैं।
NTA के मुताबिक जेईई मेन 2027 के सिलेबस में पिछले साल 2026 के मुकाबले कोई बदलाव नहीं किया गया है। BE/BTech (पेपर 1) के लिए स्टूडेंट्स को फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित की तैयारी करनी होगी। फिजिक्स में कुल 20 यूनिट हैं, जिनमें मेकॅनिक्स, थर्मोडायनामिक्स, इलेक्ट्रोस्टॅटिक्स, करंट इलेक्ट्रिसिटी, मॅग्नेटिझम, ऑप्टिक्स, इलेक्ट्रोमॅग्नेटिक वेव्हज़, ऍटम्स और न्यूक्लियाय, इलेक्ट्रॉनिक्स डिव्हासेस और एक्सपेरिमेंटल स्किल्स शामिल हैं।
केमिस्ट्री में भी कुल 20 यूनिट हैं। इसमें फिजिकल, इनऑर्गेनिक और ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के साथ प्रैक्टिकल केमिस्ट्री भी आती है। ऍटॉमिक स्ट्रक्चर, केमिकल बॉन्डिंग, थर्मोडायनामिक्स, इक्विलिब्रियम, इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री, कोऑर्डिनेशन कंपाउंड्स, हाइड्रोकार्बन्स और बायोमॉलिक्यूल्स इसके प्रमुख विषय हैं। गणित में कुल 14 यूनिट हैं: अलजेब्रा, कॅलकुलस, कोऑर्डिनेट जिओमेट्री, ट्रिगोनोमेट्री और प्रॉबेबिलिटी। इनके अलावा सेट्स अँड फंक्शन्स, मॅट्रिसेस अँड डिटरमिनेंट्स, परम्युटेशन-कॉम्बिनेशन, बायनॉमियल थ्योरम, इंटिग्रल कॅलकुलस, डिफरन्शियल इक्वेशन, 3D जिओमेट्री और वेक्टर्स प्रमुख विषय हैं।
इंजीनियरिंग के अलावा आर्किटेक्चर और प्लानिंग कोर्स में एडमिशन के लिए अलग परीक्षा होती है। पेपर 2अ (B.Arch) में गणित, ऍप्टिट्यूड टेस्ट और ड्रॉइंग टेस्ट शामिल है। पेपर 2ब (B.Planning) में गणित, ऍप्टिट्यूड टेस्ट और प्लानिंग पर आधारित सवाल पूछे जाएंगे।
जेईई एडवांस्ड IIT में दाखिले के लिए होने वाली सबसे मुश्किल प्रवेश परीक्षा है। इसके नतीजे के आधार पर मुख्य रूप से IIT में एडमिशन के लिए ऑल इंडिया रैंक (AIR) तय होती है। इसे हर साल अलग-अलग IIT करवाते हैं। तैयारी की शुरुआत 11वीं और 12वीं के फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित (PCM) की मज़बूत जानकारी से करनी पड़ती है। खासकर केमिस्ट्री के लिए NCERT की किताबें अच्छी तरह पढ़ना ज़रूरी है।
जेईई एडवांस्ड दो बार दी जा सकती है। पहला मौका 12वीं के साल में और दूसरा उसके अगले साल मिलता है। पैटर्न की बात करें तो इसमें तीन-तीन घंटे के दो पेपर होते हैं। सिलेबस में यहां भी गणित, फिजिक्स और केमिस्ट्री के ही सवाल आते हैं, मगर उनका मुश्किल लेवल ज़्यादा होता है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।