शनिवार, 7 नवंबर 2026

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नागपुर निगम स्थायी समिति में 249 कंप्यूटर ऑपरेटरों की अवधि बढ़ाने पर हंगामा, पात्रता व खर्च पर सवाल

नागपुर निगम स्थायी समिति में 249 कंप्यूटर ऑपरेटरों की अवधि बढ़ाने पर हंगामा, पात्रता व खर्च पर सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

नागपुर महानगरपालिका के विभागों में कंप्यूटर ऑपरेटर देने वाली एजेंसी की मियाद बढ़ाने के प्रस्ताव पर स्थायी समिति में सवाल उठे। कांग्रेस सदस्यों ने पारदर्शिता मांगी।

नागपुर महानगरपालिका के अलग-अलग विभागों में कंप्यूटर ऑपरेटर उपलब्ध कराने वाली एजेंसी की मियाद बढ़ाने के प्रस्ताव पर शुक्रवार को स्थायी समिति की बैठक में जोरदार बहस हुई। प्रस्ताव 249 ऑपरेटरों की नियुक्ति से जुड़ा है। बैठक में कर्मचारियों की पात्रता, उन्हें मिलने वाले असली वेतन, एजेंसी के सेवा शुल्क और ठेके के खर्च पर कई सवाल उठे। कांग्रेस के स्थायी समिति सदस्य अभिजित झा और वसीम खान ने प्रशासन को घेरा और नई ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने की मांग की।

सदस्यों ने पूछा कि महानगरपालिका में ऑपरेटर का काम करने वाले कर्मचारियों की शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता असल में क्या है। इस पद के लिए ग्रेजुएट होना, एमएस-सीआईटी सर्टिफिकेट होना, अंग्रेजी टाइपिंग में 30 से 40 शब्द प्रति मिनट और मराठी टाइपिंग में 30 शब्द प्रति मिनट की रफ्तार अपेक्षित है।

सदस्यों को शक है कि नियुक्त सभी 249 कर्मचारी ये शर्तें पूरी करते हैं या नहीं। उन्होंने हर कर्मचारी के शैक्षणिक प्रमाणपत्र और टाइपिंग की जांच की मांग की। उनका कहना था कि सिर्फ इसलिए कि एजेंसी ने कर्मचारी दिए, उनकी नियुक्ति सही नहीं हो जाती। प्रशासन को पक्का करना होगा कि तय शर्तें पूरी हुई हैं।

प्रस्ताव के आर्थिक हिस्से ने भी सदस्यों का ध्यान खींचा। हर कंप्यूटर ऑपरेटर पर महानगरपालिका की तरफ से हर महीने 25 हजार 435 रुपये का खर्च माना गया है। 249 ऑपरेटर और दो साल की अवधि को जोड़ें तो यह खर्च करीब 15 करोड़ 20 लाख रुपये तक पहुंचता है। इतने बड़े खर्च के मुकाबले कर्मचारियों के हाथ में असल में कितना वेतन आता है और एजेंसी को कितना सेवा शुल्क मिलता है, इसका साफ ब्योरा मांगा गया।

साथ ही यह जांचने की मांग भी हुई कि कर्मचारियों का भविष्य निर्वाह निधि (PF) और कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ESIC) का पैसा नियम के मुताबिक जमा होता है या नहीं। अभिजित झा और वसीम खान ने कहा कि नए ठेके से पहले प्रशासन वेतन, सेवा शुल्क और सारे आर्थिक लेन-देन का पूरा ब्योरा पारदर्शी तरीके से पेश करे।

सदस्यों ने ऑपरेटरों की बढ़ती संख्या पर भी सवाल किया। तीन साल पहले महानगरपालिका में सिर्फ 150 कंप्यूटर ऑपरेटर काम करते थे। अब यह संख्या सीधे 249 हो गई है, तो जरूरत अचानक कैसे बढ़ी, यह पूछा गया। प्रशासन से पिछले दो साल के कामकाज का ब्योरा और हर विभाग में कितने ऑपरेटर तैनात हैं, इसकी जानकारी मांगी गई।

इस एजेंसी के ठेके की मियाद 10 अक्टूबर को ही खत्म हो चुकी थी। ऐसे में सवाल उठा कि नई निविदा प्रक्रिया समय पर क्यों शुरू नहीं की गई। प्रशासन को मियाद खत्म होने की जानकारी पहले से थी, फिर भी आखिरी वक्त पर मियाद बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों लाया गया और इस देरी के लिए कौन जिम्मेदार है, इसका जवाब मांगा गया। सदस्यों ने मांग की कि नई ठेका प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो और महानगरपालिका के पैसे का सही इस्तेमाल हो, इसके लिए सारी शर्तों पर सख्ती से अमल किया जाए।

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