शनिवार, 7 नवंबर 2026

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किराये का घर छोड़ते समय दीवारें खराब मिलें तो मरम्मत का खर्च किसके जिम्मे, जानिए नियम

किराये का घर छोड़ते समय दीवारें खराब मिलें तो मरम्मत का खर्च किसके जिम्मे, जानिए नियम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

दीवार पर कीलों के गड्ढे या पेन के निशान मिलें तो मरम्मत का पैसा कौन देगा, यह नुकसान की किस्म पर टिका है। मकान मालिक डिपॉज़िट से कब पैसे काट सकता है, यह भी जानें।

किराये पर दिया हुआ घर ठीक हालत में रहे, यह हर मकान मालिक चाहता है। लेकिन कई बार किराएदार घर छोड़ते वक्त दीवारों पर कीलों के बड़े गड्ढे, दाग या खराब हुआ रंग पीछे छोड़ जाते हैं। तब सवाल उठता है कि मरम्मत का खर्च कौन उठाएगा। मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉज़िट से पैसे काट सकता है या नहीं, इसके कानूनी नियम समझना जरूरी है।

पहले सामान्य घिसावट की बात। अगर कोई किराएदार लंबे समय तक घर में रहा है, तो वक्त के साथ दीवारों का रंग फीका पड़ना या थोड़ी-बहुत गंदगी जमना स्वाभाविक है। कानूनी भाषा में इसे 'सामान्य घिसावट' माना जाता है। ऐसे में दीवारों की दोबारा रंगाई-पुताई का पूरा खर्च मकान मालिक (लैंडलॉर्ड) को ही उठाना पड़ता है। इस खर्च के लिए किराएदार जिम्मेदार नहीं होता।

नुकसान की बात अलग है। अगर किराएदार ने लापरवाही करके दीवारों में जहां-तहां बड़ी ड्रिलिंग कर दी हो, दीवारें तोड़ दी हों, या बच्चों ने दीवारों पर पेन और पेंसिल से जमकर चित्रकारी कर दी हो, तो इसे 'सामान्य घिसावट' में नहीं गिना जाता। इस तरह के अतिरिक्त नुकसान का हर्जाना या मरम्मत का खर्च किराएदार को अपनी जेब से देना पड़ता है।

पुरानी इमारत में अगर प्लास्टर अपने आप झड़ रहा हो या दीवारों में खुद-ब-खुद दरारें पड़ गई हों, तो उसकी मरम्मत की पूरी जिम्मेदारी मकान मालिक की ही रहती है।

अब डिपॉज़िट का सवाल। घर किराये पर देते समय जो सिक्योरिटी डिपॉज़िट लिया जाता है, वह घर खाली करते वक्त लौटाना बाध्यकारी होता है। लेकिन अगर किराएदार ने करारनामा तोड़कर घर या दीवारों को जरूरत से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, तो मकान मालिक तय नियमों के हिसाब से और सबूतों के आधार पर, जैसे मरम्मत का बिल, जरूरी खर्च डिपॉज़िट में से घटा सकता है। मगर अपनी मर्जी से, बिना किसी पूर्व सूचना के, चुपचाप पैसे काट लेना गलत माना जाता है।

कानून की बात करें तो भारत में मकान मालिक और किराएदार का रिश्ता ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 108 के मुताबिक चलता है। इसमें मुख्य भूमिका दोनों के बीच हुए रेंट एग्रीमेंट की शर्तों की होती है। इसलिए विवाद से बचने के लिए घर किराये पर लेते समय और छोड़ते समय घर की पहले की और मौजूदा हालत की तस्वीरें खींचकर रख लेना दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है।

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