सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 319 | Very Poor 07:47 IST

नागपुर की हवा बिगड़ी: मंगलवार को AQI 114, मुंबई और चंद्रपुर से ऊपर

सूखे मौसम और रात के गिरते तापमान के बीच नागपुर का AQI 114 दर्ज हुआ। विशेषज्ञों ने दिवाली और नवंबर की ठंड से पहले सख्त कदम उठाने की मांग की है।

नागपुर की हवा बिगड़ी: मंगलवार को AQI 114, मुंबई और चंद्रपुर से ऊपर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर की हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है। सूखा मौसम और रात में गिरता तापमान मिलकर शहर में हानिकारक धूल के कणों को जमीन के पास फंसा रहे हैं। मंगलवार को नागपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 114 पर पहुंच गया, जो "मध्यम" श्रेणी में आता है। यह आंकड़ा CPCB के 21 अक्टूबर को शाम 4 बजे जारी बुलेटिन पर आधारित है।

इसी बुलेटिन के मुताबिक मुंबई का AQI 111 और चंद्रपुर का 97 रहा, यानी नागपुर इन दोनों से ऊपर रहा। पुणे का AQI 118 था, जो नागपुर से थोड़ा ही आगे है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि त्योहारों का मौसम आने वाला है और पटाखे भी बढ़ेंगे। उनका कहना है कि नवंबर में तापमान और गिरा तो प्रदूषण काफी बढ़ जाएगा। अगर अभी सख्ती से कदम नहीं उठाए गए तो नागपुर ऐसे पर्यावरण और सेहत के संकट में फंस सकता है, जिसे टाला जा सकता था।

प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों में PM10 के स्तर कई इलाकों में ऊंचे दिखे। अंबाझरी और राम नगर में सबसे ऊंचा PM10 स्तर 148 µg/m³ रहा। महल में यह 146 µg/m³ और GPO सिविल लाइंस में 132 µg/m³ दर्ज हुआ। अंबाझरी और राम नगर में हरियाली काफी है, फिर भी वहां इतने ऊंचे आंकड़े चिंता की बात बताए गए हैं। इससे लगता है कि हवा में प्रदूषण को फंसाने वाले हालात और प्रदूषण के स्रोत हरियाली के प्राकृतिक असर पर भारी पड़ रहे हैं।

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) की क्षेत्रीय अधिकारी हेमा देशपांडे ने हवा बिगड़ने की कुछ मुख्य वजहें बताईं। इनमें गाड़ियों की बढ़ती संख्या और उनका धुआं, लंबे समय तक सूखा मौसम और रात का गिरता तापमान शामिल है, जिससे प्रदूषक फैल नहीं पाते और PM10 जमीन के पास जमा हो जाता है। दिवाली से पहले बढ़ते पटाखे और ठोस कचरे व सूखे पत्तों का खुले में जलाया जाना भी वजहों में गिना गया। कचरा उठाने का काम अनियमित होने से यह और बढ़ता है।

बोरगांव जैसे इलाकों के निवासियों का कहना है कि सुबह-सुबह खुले में कचरा जलाने की घटनाएं आम हैं। उनके मुताबिक सूखे पत्ते, प्लास्टिक और ठोस कचरा नगर निगम की तरफ से नियमित नहीं उठाया जाता। इसी वजह से आम लोग और सफाई कर्मचारी खुले में कचरा जला रहे हैं, जिससे सुबह का धुंआ बढ़ रहा है।

अस्पतालों की तरफ से बताया गया है कि बच्चों और पहले से सांस की बीमारी वाले लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। बच्चों के फेफड़ों के डॉक्टरों के मुताबिक खांसी बढ़ने, अस्थमा के दौरे तेज होने और सांस के संक्रमण 10 से 15 दिन तक खिंचने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार अस्थमा वाले बच्चों में इन्हेलर की दवा दोबारा शुरू करनी पड़ रही है या उसकी डोज बढ़ानी पड़ रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने माता-पिता और नागरिकों से धूल भरी जगहों से दूर रहने और कमजोर लोगों के लिए इन्फ्लुएंजा का टीका जल्द लगवाने की अपील की है।

विशेषज्ञों ने सर्दी और दिवाली से पहले हालात काबू में रखने के लिए प्रशासन और पुलिस से बिना देर कदम उठाने को कहा है। पहला, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के उपाय तुरंत लागू हों, ताकि ज्यादा प्रदूषण वाली गतिविधियों पर रोक लगे और भारी गाड़ियों की आवाजाही नियंत्रित हो। दूसरा, नगर निगम रात और सुबह गश्त करे और भारी जुर्माना लगाए, ताकि कचरा और सूखे पत्ते खुले में जलना पूरी तरह बंद हो।

तीसरा, रिहायशी और व्यावसायिक सभी इलाकों में पत्तों और रिसाइकल होने लायक कचरे का रोजाना बिना रुकावट उठाव हो, ताकि लोगों को जलाने की जरूरत ही न पड़े। चौथा, पटाखों पर संयम को लेकर सख्त जन-सूचना जारी हो और संवेदनशील लोगों को सांस की सुरक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे