प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी आर्किटेक्ट्स पर क्यों? वास्तुकला परिषद ने बीएमसी के फैसले पर जताई आपत्ति
मुंबई महानगरपालिका ने निर्माण साइट्स पर प्रदूषण रोकने की गारंटी आर्किटेक्ट्स से मांगी, तो काउन्सिल ऑफ आर्किटेक्चर ने इसे गलत बताते हुए पालिका आयुक्त को पत्र लिखा।
मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए मुंबई महानगरपालिका ने एक फैसला लिया था, जिस पर अब वास्तुकला परिषद यानी काउन्सिल ऑफ आर्किटेक्चर ने कड़ी आपत्ति जताई है। पालिका ने अपने आदेश में कहा था कि निर्माण साइट्स पर प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू करने की जिम्मेदारी लेते हुए आर्किटेक्ट्स को एक बाध्यकारी हमीपत्र देना होगा। परिषद का कहना है कि निर्माण या तोड़फोड़ वाली जगह पर असल में उपाय लागू करना जमीन मालिक, डेवलपर और ठेकेदार की जिम्मेदारी है, और यह बोझ आर्किटेक्ट्स पर नहीं डाला जा सकता। परिषद ने पालिका आयुक्त को पत्र लिखकर इस परिपत्रक में तुरंत सुधार करने की मांग की है।
यह पूरा मामला हाई कोर्ट के निर्देश से जुड़ा है। हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार मुंबई महानगरपालिका ने 2 सितंबर 2026 को एक परिपत्रक जारी किया था। इस परिपत्रक के जरिए निर्माण और तोड़फोड़ की जगहों पर धूल और वायु प्रदूषण रोकने के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आर्किटेक्ट्स से हमीपत्र लेना अनिवार्य कर दिया गया था। इसी पर केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली स्वायत्त वैधानिक संस्था वास्तुकला परिषद के रजिस्ट्रार दीपक कुमार ने पालिका आयुक्त को पत्र भेजकर परिषद का पक्ष रखा है।
पत्र में परिषद ने वास्तुविद् कानून, 1972 और इसके तहत बनी व्यावसायिक आचार संहिता नियमावली, 1989 का हवाला दिया है। परिषद के मुताबिक रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट सिर्फ अपने पेशेवर दायरे में आने वाले कामों के लिए ही जवाबदेह होते हैं। पालिका की इस शर्त से आर्किटेक्ट्स पर उनकी कानूनी और पेशेवर जिम्मेदारियों से कहीं ज्यादा बोझ डाला जा रहा है, जो केंद्रीय कानून के ढांचे से भी टकराता है। इसीलिए परिषद ने मांग की है कि पालिका 2 सितंबर के परिपत्रक में जरूरी स्पष्टीकरण देते हुए सुधार करे, निर्माण के असल प्रबंधन से जुड़े लोगों पर ही जिम्मेदारी तय करे, और इस मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी परिषद को दे।
परिषद ने साफ किया है कि वायु प्रदूषण रोकने के लिए पालिका की मुहिम और हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करने के मकसद का वह पूरा समर्थन करती है। लेकिन निर्माण साइट पर असल में काम शुरू करना, तोड़फोड़ करना और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को रोजाना लागू करना - यह पूरी जिम्मेदारी जमीन मालिक, डेवलपर, निर्माण ठेकेदार और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम की होती है। परिषद का तर्क है कि आर्किटेक्ट का काम सिर्फ डिजाइन-नक्शे तक सीमित होता है, साइट पर रोजमर्रा के काम पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में वहां होने वाली हर गतिविधि, कमी या नियमों के उल्लंघन की कानूनी और पेशेवर जिम्मेदारी आर्किटेक्ट्स पर डालना गलत है।