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16:41 IST

नागपुर में 6 अक्टूबर के शटडाउन के बाद भी नल सूखे, 72 घंटे बाद तक नहीं सुधरी जलापूर्ति

पेंच-4 जल शुद्धिकरण केंद्र में पाइपलाइन का काम लंबा खिंचा, कई इलाकों में लोग पानी के लिए परेशान हैं और मनपा के अधिकारियों पर सुस्ती के आरोप हैं।

नागपुर में 6 अक्टूबर के शटडाउन के बाद भी नल सूखे, 72 घंटे बाद तक नहीं सुधरी जलापूर्ति तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर शहर में सुधार और दुरुस्ती के नाम पर बार-बार होने वाले जलापूर्ति शटडाउन से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। 6 अक्टूबर को शहर के कुछ हिस्सों में 36 घंटे और कुछ हिस्सों में 12 घंटे का शटडाउन लिया गया था। लेकिन 72 घंटे गुजर जाने के बाद भी इन इलाकों में पानी की सप्लाई ठीक से शुरू नहीं हो पाई।

पूरे शहर में हाहाकार मचा है, फिर भी मनपा के किसी अधिकारी ने हालात की खबर नहीं ली। कई इलाकों में लोगों को मजबूरी में अपना घर तक छोड़ना पड़ा है। कुछ घरों में तो पानी न होने से टॉयलेट जाना भी मुश्किल हो गया है। जलसंकट इतना गंभीर है, फिर भी दफ्तर में कोई अधिकारी संजीदा नजर नहीं आया।

सिविल लाइंस, सीताबर्डी और म्हालगीनगर जैसे इलाकों में भी लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ीं। शहर के ज्यादातर हिस्सों में यही हाल है।

पेंच-4 जल शुद्धिकरण केंद्र में पाइपलाइन शिफ्ट करने के लिए जलापूर्ति बंद की गई थी। तय 36 घंटे पूरे होने के बाद भी सप्लाई शुरू नहीं हो सकी। विश्व बैंक के प्रोजेक्ट की ओर से काम समय पर नहीं हुआ, इसी वजह से जलापूर्ति बंद रखने की अवधि बढ़ानी पड़ी। इसका सीधा असर प्रभावित इलाकों के नागरिकों पर पड़ा है, जो पानी की किल्लत झेल रहे हैं।

नागपुर मनपा ने बताया है कि शुक्रवार से जलापूर्ति को चरणबद्ध तरीके से सामान्य करने की कोशिश शुरू की जाएगी। महापौर नीता ठाकरे ने संबंधित अधिकारियों को काम तेज करने और जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार देर शाम उपमहापौर लीला हाथीबेड ने मौके पर पहुंचकर चल रहे काम का निरीक्षण किया।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि स्नातक सीट के चुनाव की आचार संहिता लागू होने की वजह से पदाधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। पदाधिकारी नहीं थे तो अधिकारियों ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जानकारों की मानें तो आचार संहिता में अति आवश्यक कामों की मंजूरी वैसे भी रहती है। जनता को पानी देने से ज्यादा जरूरी काम और क्या होगा। फिर भी आचार संहिता के नाम पर जनता की नाराजगी अनसुनी कर दी गई और गुरुवार को लोग पूरी तरह भगवान भरोसे रह गए।

जानकारों के अनुसार मनपा में सत्ता बनने के बाद से अधिकारी सिर्फ पदाधिकारियों के निर्देश पर काम कर रहे हैं। इसके बिना किसी समस्या या अचानक पैदा हुई स्थिति पर भी वे ध्यान नहीं देते।

सूत्रों के मुताबिक जलापूर्ति की पूरी व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपे जाने के बाद से जलापूर्ति विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ नाम के लिए संभाल रहे मनपा अधिकारी फिलहाल मौज में हैं। न कोई जानकारी दी जा रही है, न समस्या सुलझाने की दिशा में गंभीरता से काम होता दिख रहा है। जलापूर्ति विभाग में असलियत जानने के लिए किसी अधिकारी से पूछो तो वह दूसरी वरिष्ठ महिला अधिकारी के पास अधिकार होने की बात कहकर टाल देता है। महिला वरिष्ठ अधिकारी के पास जाने पर सीधे कार्यकारी अभियंता के पास भेज दिया जाता है। एक ही कमरे में बैठने के बावजूद दोनों अधिकारियों में तालमेल नजर नहीं आता।

सूत्रों की मानें तो शहर में किसी न किसी इलाके में जलसंकट लगातार बना रहता है और अब मनपा अधिकारी इसे आम बात बनाने में लगे हैं। यही वजह है कि जल वितरण संभाल रही ओसीडब्ल्यू कंपनी के कामकाज पर भी अधिकारियों का अंकुश नहीं रहा। मनपा की सभा में पार्षद कई बार तीखी नाराजगी और खेद जता चुके हैं, लेकिन अब तक किसी की जिम्मेदारी वाकई तय नहीं हुई। इसी वजह से निजी कंपनी भी बेखौफ होती जा रही है। समय रहते अंकुश नहीं लगा तो आने वाले दिनों में शहर को भारी जलसंकट से गुजरना पड़ सकता है, और इसकी आहट राज्य सरकार की ओर से भी दी गई है।

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