पिंपरी-चिंचवड में 16 अक्टूबर से 10 फीसदी पानी कटौती, रोज की कमी 172 एमएलडी तक पहुंचेगी
पवना और आंद्रा बांध सौ फीसदी भरे होने के बावजूद जलसंपदा विभाग ने 16 अक्टूबर से 10 फीसदी कटौती का फैसला किया है।
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पवना और आंद्रा, दोनों बांध सौ फीसदी भरे हुए हैं, फिर भी पिंपरी-चिंचवड के लोगों की पानी की परेशानी खत्म नहीं हुई है। राज्य सरकार के जलसंपदा विभाग ने 16 अक्टूबर से शहर में 10 फीसदी और पानी कटौती लागू करने का फैसला किया है। शहर में पहले ही 25 नवंबर 2019 से, यानी पिछले सात साल से, एक दिन छोड़कर पानी आ रहा है। अब त्योहारों के मौसम में शहर की रोज की पानी की कमी 105 एमएलडी से बढ़कर सीधे 172 एमएलडी हो जाएगी और लोगों की दिक्कत और बढ़ेगी।
बताया गया है कि इस साल राज्य के कई हिस्सों में एल निनो के असर से बारिश काफी कम हुई है। अक्टूबर से ही गर्मी बढ़ गई है, जमीन के नीचे कुओं और बोरवेल का जलस्तर गिर गया है और आने वाली गर्मियों में पानी की किल्लत की आशंका है। इन्हीं बातों को देखते हुए राज्य सरकार ने सभी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को पानी संभलकर इस्तेमाल करने के आदेश दिए हैं। अगले पूरे साल की योजना बनाने के लिए जलसंपदा विभाग ने महानगरपालिकाओं को 10 फीसदी पानी कटौती अनिवार्य रूप से करने को कहा है। साथ ही साफ चेतावनी दी है कि इसका सख्ती से पालन नहीं हुआ और आगे किल्लत पैदा हुई, तो जिम्मेदारी महानगरपालिका प्रशासन की होगी।
अब आंकड़ों की बात। शहर की रोज की कुल मांग 770 एमएलडी है, जबकि अभी असल में 665 एमएलडी पानी मिल रहा है। इसमें पवना बांध से 540 एमएलडी, आंद्रा बांध से 95 एमएलडी और एमआईडीसी से 30 एमएलडी आता है। यानी अभी रोज की कमी 105 एमएलडी है। 10 फीसदी कटौती के बाद शहर को 598 एमएलडी पानी मिलेगा और कुल कमी बढ़कर 172 एमएलडी हो जाएगी।
नई बसी उपनगरों पर इस कमी की सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। वाकड इलाके की 200 से 500 फ्लैट वाली 34 बड़ी हाउसिंग सोसायटियों को महानगरपालिका अभी सिर्फ 50 फीसदी पानी दे रही है। इस वजह से महंगाई के इस दौर में रहने वालों को रोज हजारों रुपये खर्च करके प्राइवेट टैंकर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि जब तक भामा आसखेड प्रकल्प का पानी शहर में सच में नहीं आता, तब तक इस इलाके को पूरी क्षमता से पानी देना मुमकिन नहीं है।
शहर में एक दिन छोड़कर पानी देने का फैसला महानगरपालिका ने 25 नवंबर 2019 को लागू किया था। तर्क यह था कि बढ़ती आबादी को ठीक दबाव से और बराबरी से पानी मिले। अगले महीने इस अस्थायी फैसले को सात साल पूरे हो रहे हैं। इसके बावजूद पालिका वितरण व्यवस्था सुधार नहीं पाई है और कम पानी तथा कम दबाव की शिकायतें शहर में बनी हुई हैं। अब 10 फीसदी कटौती जुड़ने से लोगों में भारी नाराजगी है।
जलसंपदा विभाग के कार्यकारी अभियंता किरण देशमुख ने कहा, "आने वाली 16 अक्टूबर से 10 फीसदी पानी कटौती लागू करने के बारे में राज्य सरकार के साफ आदेश हैं। उसके मुताबिक पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका को आधिकारिक पत्र भेजा जाएगा।"
पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के पानी आपूर्ति विभाग के सह शहर अभियंता अजय सूर्यवंशी ने कहा, "शहर में मांग के मुकाबले पानी पहले ही कम मिल रहा है। 16 अक्टूबर से बांध से जितना पानी छोड़ा जाएगा, उसके हिसाब से शहर के अंदर पानी का नए सिरे से बंटवारा किया जाएगा।"