शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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नागपुर में 2011 की अरुण फरेरा की गिरफ्तारी गैरकानूनी, हाईकोर्ट ने दिए 2 लाख मुआवजे के आदेश

नागपुर में 2011 की अरुण फरेरा की गिरफ्तारी गैरकानूनी, हाईकोर्ट ने दिए 2 लाख मुआवजे के आदेश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने अरुण फरेरा की 2011 की गिरफ्तारी को गैरकानूनी ठहराया और राज्य सरकार को आठ हफ्ते में 2 लाख रुपये मुआवजा जमा करने को कहा।

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाने वाला अहम फैसला सुनाया है। सामाजिक कार्यकर्ता अरुण थॉमस फरेरा को 2011 में नागपुर सेंट्रल जेल के बाहर गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट ने इस गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार दिया है। महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया गया है कि वह फरेरा को 2 लाख रुपये का मुआवजा दे।

यह फैसला 27 अक्टूबर को आया। जस्टिस उर्मिला जोशी-फाळके और जस्टिस राज डी. वाकोडे की बेंच ने यह निर्णय दिया। कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि कानून की रक्षा करने की जगह पुलिस ने खुद कानून तोड़ा।

मामला यह था कि 2011 में कई केसों में बरी होने के बाद अरुण फरेरा 27 सितंबर को नागपुर सेंट्रल जेल से बाहर निकले। जेल के बाहर कदम रखते ही साधारण कपड़ों में मौजूद पुलिसवालों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और एक अनजान गाड़ी में बिठाकर ले गए।

उस वक्त फरेरा की मां, भाई और वकील मौके पर मौजूद थे। इसके बावजूद पुलिस ने गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई। कोर्ट ने पुलिस को इस बात पर भी फटकार लगाई कि फरेरा जेल में बंद थे, फिर भी उन्हें फरार दिखाया गया था।

कोर्ट ने साफ कहा कि इस कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 21 यानी निजी आजादी के अधिकार का उल्लंघन हुआ। साथ ही अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तारी से जुड़ी सुरक्षा का भी उल्लंघन हुआ।

राज्य सरकार की तरफ से दलील दी गई थी कि नक्सलवाद से कथित संबंध के कारण कार्रवाई को गुप्त रखना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की वजह बताने की संवैधानिक जिम्मेदारी किसी भी हालत में टाली नहीं जा सकती।

कोर्ट ने अहम टिप्पणी की कि जब कानून की रक्षा करने वाली पुलिस ही कानून का उल्लंघन करे, तो उसकी गंभीरता को समझते हुए उचित कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस के ध्येय वाक्य 'सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय' की याद भी दिलाई।

सरकार को आठ हफ्ते के अंदर 2 लाख रुपये का मुआवजा जमा करना होगा। अगर फरेरा को इससे ज्यादा मुआवजा चाहिए, तो कोर्ट ने उन्हें दीवानी दावा दायर करने की छूट भी दी है।

फरेरा 2018 के भीमा कोरेगाव मामले में आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।

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