बुलढाणा के 3.36 लाख किसानों के खाते में 67.36 करोड़ रुपये पहुंचे, पीएम किसान की 24वीं किस्त
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी हुई। बुलढाणा जिले के 3 लाख 36 हजार 825 पात्र किसान परिवारों के खाते में 67 करोड़ 36 लाख रुपये सीधे जमा किए गए।
बुलढाणा, 30 तारीख। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों जारी की गई। इसके तहत बुलढाणा जिले के 3 लाख 36 हजार 825 पात्र किसान परिवारों के बैंक खातों में 67 करोड़ 36 लाख रुपये सीधे जमा किए गए हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि दिवाली के मौके पर केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग योजनाओं से किसानों को आर्थिक सहारा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पात्र किसानों को दो हजार रुपये की 24वीं किस्त दी गई है। इसके साथ ही राज्य सरकार सूखे जैसे हालात और फसलों के नुकसान को देखते हुए पांच हजार रुपये की अग्रिम मदद दे रही है। जाधव के मुताबिक दोनों योजनाओं को मिलाकर पात्र किसानों को दिवाली से पहले कुल सात हजार रुपये का सहारा मिलेगा।
डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के तहत बुलढाणा के कृषि विज्ञान केंद्र में इस कार्यक्रम के सीधे प्रसारण का आयोजन किया गया था। वहां डॉ. धनराज उंदीरवाडे (संचालक, विस्तार शिक्षण), डॉ. प्रमोद वाकळे (सहयोगी अधिष्ठाता), संतोष डाबरे (जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी), डॉ. सतीश जाधव (प्राचार्य, कृषि तंत्र विद्यालय, बुलढाणा), अमोल झापे (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, बुलढाणा), ओमसिंग राजपूत, अनुजा सावळे और अॅड. गायकवाड मौजूद थे। जिले के किसान, महिला बचत गटों की प्रतिनिधि और पत्रकार भी आए थे।
कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के संभावित असर से खेती के सामने खड़ी चुनौतियों का जिक्र हुआ। किसानों से अपील की गई कि वे आधुनिक तकनीक का अच्छे से इस्तेमाल करें। एंड्रॉइड मोबाइल और डिजिटल माध्यम से फसलों पर रोग और कीड़ों की फोटो अपलोड करके जांच और सलाह लेने की सुविधा का फायदा उठाने को कहा गया। यह भी कहा गया कि मिट्टी जांच की रिपोर्ट सरल मराठी में दी जाए, ताकि किसान आसानी से समझ सकें। संबंधित विभाग को सुझाव दिया गया कि रिपोर्ट इस तरह बने कि मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश (NPK) की मात्रा समझ आ जाए।
रबी सीजन में चारा फसलों की योजना पर जोर दिया गया। आने वाले दिनों में पानी की संभावित किल्लत को देखते हुए मौजूद पानी का सख्ती से हिसाब रखना जरूरी बताया गया। पीने के पानी की जरूरत और मवेशियों के चारे की उपलब्धता को ध्यान में रखकर किसानों से रबी की योजना बनाने को कहा गया। चना, ज्वार और चारा फसलों की खेती को प्राथमिकता देने की अपील हुई। चारे के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से हमीभाव पर चारा खरीदने की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में कहा गया कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य पाने के लिए महिला सशक्तीकरण और आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। खेती और उससे जुड़े कारोबार में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के साथ महिला बचत गटों के जरिए रोजगार और आमदनी के मौके देने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अमोल झापे ने रखी। विस्तार शिक्षण के संचालक डॉ. धनराज उंदीरवाडे और जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी संतोष डाबरे ने कृषि क्षेत्र की अलग-अलग योजनाओं की जानकारी दी। दोनों ने बदलते मौसम के बीच आने वाले रबी सीजन की योजना, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और पानी व चारे के प्रबंधन की अहमियत को रेखांकित किया। इस मौके पर कुछ महिला बचत गटों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानपत्र देकर प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित भी किया गया।
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