अमरावती APMC के संचालकों की याचिका हाई कोर्ट नागपुर पीठ ने खारिज की, नोटिस का जवाब देना होगा
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने कारण बताओ नोटिस को चुनौती देने वाली अमरावती APMC के निर्वाचित संचालकों की याचिका को समय से पहले दायर बताते हुए खारिज कर दिया।
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बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने अमरावती कृषि उपज बाजार समिति (APMC) के निर्वाचित संचालकों को झटका दिया है। संचालकों ने उन्हें भेजे गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
मामला नागपुर जिला उप पंजीयक के 21 अप्रैल 2025 के नोटिस से जुड़ा है। यह नोटिस महाराष्ट्र कृषि उपज बाजार समिति विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1963 की धारा 45(1) के तहत जारी किया गया था। नोटिस में संचालकों के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। इसके खिलाफ हरीश मोरे और अन्य की ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी।
हाई कोर्ट ने इससे पहले 12 जून 2025 और 18 जून 2025 के आदेशों से अंतिम निर्णय लेने पर रोक लगा रखी थी। अब याचिका खारिज होने के बाद संचालकों को नोटिस का जवाब देना होगा।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि कारण बताओ नोटिस के खिलाफ यह याचिका समय से पहले, यानी अपरिपक्व है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने अभी नोटिस का जवाब ही पेश नहीं किया है। प्रतिवादियों की ओर से अधि. महेश धात्रक ने भी गंभीर आरोपों को सामने रखते हुए याचिका का विरोध किया।
सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधि. एम. जी. भांगड़े ने दलील दी कि जांच रिपोर्ट में आरोप बाजार समिति के खिलाफ हैं, लेकिन अधिनियम की धारा 12 के तहत बाजार समिति को निगमित निकाय (बॉडी कॉर्पोरेट) के रूप में नोटिस नहीं दिया गया। उनका कहना था कि नोटिस सिर्फ निदेशकों को व्यक्तिगत रूप से भेजा गया, जबकि नियम के हिसाब से वह खुद बाजार समिति को दिया जाना चाहिए था।
इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे और सहायक सरकारी वकील एन. एस. राव ने कहा कि 1963 के अधिनियम की धारा 2 (जे) के तहत बाजार समिति में उसके संचालक भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जांच में सभी संचालक प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं, इसलिए सभी को नोटिस जारी किए गए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि धारा 2 (जे), धारा 11 और धारा 13 के तहत कार्रवाई सभी संचालकों के खिलाफ है। इसलिए जिला उप पंजीयक का सभी संचालकों को नोटिस जारी करना अवैध नहीं है। कोर्ट के मुताबिक केवल बाजार समिति को अलग से नोटिस न देने से कारण बताओ नोटिस अमान्य नहीं हो जाता, क्योंकि कथित अवैधताओं के लिए सभी निदेशकों को उत्तरदायी ठहराया गया है।
याचिका खारिज करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट भी दी कि अगर कारण बताओ नोटिस के आधार पर उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित होता है, तो वे कानून के मुताबिक उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।