नागपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में बनेगी नई सी-विंग, 270 बेड और बढ़ाने की योजना
नागपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में चार मंजिला सी-विंग बन रही है। योजना बेड 230 से बढ़ाकर 500 करने की है और इमारत मार्च 2027 तक सौंपने का लक्ष्य है।
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नागपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अब बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। मरीजों को बेहतर इलाज देने और अस्पताल की क्षमता बढ़ाने के लिए ओपीडी और वार्डों का नवीनीकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही चार मंजिला सी-विंग भी बनाई जा रही है। नागपुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल यानी मेडिकल में भी विकास कार्य तेज हुए हैं।
योजना के तहत अस्पताल में बेड की संख्या 230 से बढ़ाकर 500 तक की जाएगी। यानी अभी के मुकाबले 270 बेड ज्यादा मिलेंगे। यह अस्पताल की बेड क्षमता में करीब 117 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी।
अभी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कुल 9 विभाग चल रहे हैं। इनमें से कुछ विभागों में मरीजों को सिर्फ बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में सलाह और इलाज मिलता है। बाकी विभागों में भर्ती मरीजों के लिए कुल 230 बेड हैं। मरीजों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए बेड क्षमता बढ़ाई जा रही है।
नई सी-विंग में कैथलैब, आईसीयू, इको जांच की सुविधा, विभाग प्रमुखों के कक्ष, डे केयर सेंटर और सेमिनार हॉल बनाए जाएंगे। सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग (PWD) की ओर से इमारत का काम तेजी से किया जा रहा है। तय योजना के मुताबिक मार्च 2027 तक नई इमारत अस्पताल प्रशासन को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
हृदय रोग समेत कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं की जरूरत लगातार महसूस की जा रही थी। ऐसे में सी-विंग बनने से अस्पताल का ढांचा मजबूत होगा। कैथलैब से हृदय से जुड़ी जांच और इलाज की व्यवस्था का दायरा बढ़ेगा, जबकि गहन देखभाल इकाई यानी आईसीयू गंभीर मरीजों की देखभाल के काम आएगी। इको जांच, विभाग प्रमुखों के अलग कक्ष और डे केयर सेंटर भी इसी इमारत में बनेंगे।
सेमिनार हॉल बनने से पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी गतिविधियों, चिकित्सा संबंधी चर्चाओं और ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए भी जगह मिलेगी। इन सुविधाओं से अस्पताल का कामकाज ज्यादा व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
बेड की संख्या 500 तक पहुंचने पर अस्पताल एक साथ ज्यादा मरीजों को भर्ती कर सकेगा। 230 की तुलना में 270 अतिरिक्त बेड गंभीर और जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए अहम साबित हो सकते हैं। हालांकि इस लक्ष्य के लिए इमारत के साथ-साथ जरूरी चिकित्सा उपकरण, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और दूसरे संसाधन भी उपलब्ध होना जरूरी होगा।
अस्पताल की ओएसडी डॉ. सुषमा ठाकरे के मुताबिक नवीनीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है। सी-विंग की इमारत बनने के बाद जगह की कमी दूर हो जाएगी, जिससे डॉक्टरों को सुविधा मिलेगी और मरीजों को भी फायदा होगा। प्रशासन की कोशिश है कि विभागों के विस्तार के बाद बेड क्षमता 500 तक ले जाई जाए। आगे चलकर कुछ और विभागों में स्नातकोत्तर की सीटें भी बढ़ सकती हैं।