अविवाहित बेटी को भी गुजारा भत्ते का हक, नागपुर खंडपीठ का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कहा कि जो अविवाहित बालिग बेटी खुद का खर्च नहीं उठा सकती, उसका गुजारा भत्ता सिर्फ बालिग होने के कारण नहीं रोका जा सकता।
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बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि अगर अविवाहित बालिग बेटी अपना खर्च खुद उठाने की हालत में नहीं है, तो पिता से मिलने वाला गुजारा भत्ता उसे सिर्फ इस वजह से नहीं रोका जा सकता कि वह बालिग हो गई है। यह भी वजह नहीं बन सकती कि गुजारा भत्ता पाने के लिए उसके पास दूसरे कानूनी रास्ते मौजूद हैं।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि बालिग हो चुके बेटे के गुजारा भत्ते में बदलाव चाहिए तो इसके लिए अलग से अर्जी दी जा सकती है। इसके साथ ही फैमिली कोर्ट का वह आदेश बरकरार रखा गया, जिसमें बेटे और बेटी को सात-सात हजार रुपये गुजारा भत्ता देने को कहा गया था।
जस्टिस मेहरोज पठाण ने शिक्षक आनंद चौहान की क्रिमिनल रिविजन पिटीशन खारिज कर दी। चौहान ने नागपुर की फैमिली कोर्ट के 7 दिसंबर 2019 के आदेश को चुनौती दी थी। आनंद चौहान शिक्षक हैं और उन्हें हर महीने 71 हजार रुपये तनख्वाह मिलती है। उनकी पत्नी भी शिक्षिका हैं और उनका मासिक वेतन 40 हजार रुपये है। पत्नी खुद कमाती हैं, इसलिए फैमिली कोर्ट ने उन्हें गुजारा भत्ता देने से मना कर दिया था। लेकिन दोनों बच्चों की परवरिश के लिए सात-सात हजार रुपये देने का आदेश दिया था।
पिता की तरफ से दलील दी गई कि बेटी बालिग और अविवाहित है, इसलिए उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता नहीं मिल सकता। उनका कहना था कि बेटी को हिंदू दत्तक व निर्वाह अधिनियम, 1956 की धारा 20 (3) के तहत अलग अर्जी देनी चाहिए। पिता ने यह भी कहा कि याचिका कोर्ट में पेंडिंग रहने के दौरान बेटा भी बालिग हो गया, इसलिए उसे भी गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता।
कोर्ट ने अपने निरीक्षण में कहा कि पिता यह साबित नहीं कर पाए कि बेटी अपना खर्च खुद उठा सकती है। इसलिए सिर्फ इस आधार पर उसका गुजारा भत्ता नहीं रोका जा सकता कि वह बालिग हो गई है या उसके पास दूसरा कानूनी रास्ता है।
बेटे के बारे में कोर्ट ने कहा कि जब गुजारा भत्ते का आदेश दिया गया था, उस वक्त वह नाबालिग था, लेकिन अब वह बालिग हो चुका है। ऐसे में उसके गुजारा भत्ते में बदलाव की जरूरत हो, तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 127 के तहत सही अदालत में अर्जी दी जा सकती है।