नागपुर के रानी कोठी में बंगाली समाज ने सिंदूर खेला के साथ दी मां दुर्गा को विदाई
पश्चिम नगरीय बंगाली कल्चरल एसोसिएशन ने सिविल लाइंस के नए venue पर दुर्गा पूजा 2026 मनाई और विजयादशमी पर परंपरागत सिंदूर खेला के साथ मां को विदा किया।
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नागपुर के सिविल लाइंस में स्थित रानी कोठी में इस बार बंगाली समाज की दुर्गा पूजा की रौनक रही। पश्चिम नगरीय बंगाली कल्चरल एसोसिएशन (PNBCA) ने दुर्गा पूजा 2026 अपने नए ठिकाने रानी कोठी में मनाई। विजयादशमी के दिन मां दुर्गा को विदाई देते वक्त परंपरागत सिंदूर खेला हुआ। इसमें शादीशुदा महिलाओं ने देवी को सिंदूर चढ़ाया और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाया।
सिंदूर खेला बंगाली दुर्गा पूजा की सबसे प्यारी परंपराओं में गिना जाता है। महिलाएं पहले देवी को सिंदूर अर्पित करती हैं, उसके बाद साथ आई दूसरी भक्तों के साथ सिंदूर का आदान-प्रदान करती हैं। यह रस्म सुख, समृद्धि और सुहाग की सलामती की दुआ का प्रतीक है। इसमें बहनापे और समाज के आपसी रिश्ते की झलक भी दिखती है, जो पूरे उत्सव का दिल है।
PNBCA का सफर 2014 में शुरू हुआ था। मकसद था खुले दिल से दुर्गा पूजा मनाना और समाज के हर तबके के लोगों का स्वागत करना। इस साल का आयोजन संस्था के सफर का नया पन्ना माना जा रहा है।
संस्था ने शुरुआत में 2014 से 2016 तक नागपुर के IWWA में पूजा की। फिर 2017 से 2019 तक भारत लॉन्स में उत्सव मनाया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान भी PNBCA ने पूजा-पाठ जारी रखा। 2020 में घट पूजा हुई और 2021 में सिर्फ सदस्यों के लिए पूजा रखी गई।
2022 से 2025 तक संस्था ने सिविल लाइंस के लेडीज क्लब लॉन्स में दुर्गा पूजा करवाई। इस साल वह रानी कोठी, सिविल लाइंस आ गई। वजह यह रही कि यहां ज्यादा जगह है और जगह साफ-सुथरी है। मां दुर्गा के भोग के लिए खाना पकाने की बेहतर सुविधा है। धार्मिक रस्मों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक मेल-मिलाप के इंतजाम भी बेहतर हो सकते हैं।
PNBCA के लिए दुर्गा पूजा सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं है। संस्था अपने उत्सव के केंद्र में अंतरिकता (Antarikota) को रखती है, यानी अपनापन, नजदीकी और एकजुटता का एहसास।
सिंदूर खेला के लिए जब पूरा समाज जमा हुआ, तो यह रस्म आस्था, बंगाली विरासत और मिल-जुलकर जश्न मनाने के पक्के रिश्ते की मिसाल बन गई। सालों में जगह बदलती रही और संस्था बढ़ती गई, फिर भी लोगों का स्वागत करने और सांस्कृतिक परंपराओं को बचाए रखने का PNBCA का इरादा जस का तस है।
रानी कोठी का यह आयोजन संस्था के लिए एक और पड़ाव है। भक्ति, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और समाज को जोड़ने का उसका सफर नागपुर में इसी तरह आगे बढ़ रहा है।
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