नागपुर जिले के 3 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में 5-5 हजार रुपये, दीपावली से पहले राहत
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कम बारिश से सूखे जैसे हालात झेल रहे नागपुर जिले के किसानों को राज्य सरकार ने त्योहार से पहले सीधे खाते में मदद भेजी है। कुल 152 करोड़ 63 लाख 70 हजार रुपये बांटे गए हैं।
इस साल बारिश कम हुई और नागपुर जिले के किसान सूखे जैसे हालात से जूझ रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने उन्हें दीपावली से ठीक पहले आर्थिक मदद भेजी है। हर किसान के बैंक खाते में 5-5 हजार रुपये जमा किए गए हैं, जिससे हजारों परिवारों को कुछ सहारा मिला है।
जिले के 3 लाख 5 हजार 274 किसानों को इस राहत का फायदा मिला है। हर पात्र किसान को 5 हजार रुपये के हिसाब से कुल 152 करोड़ 63 लाख 70 हजार रुपये उनके खातों में पहुंचे हैं। इतने किसानों तक एक साथ मदद पहुंचना जिले की खेती के लिए अहम माना जा रहा है।
मानसून में उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं गिरा, इसलिए जिले के कई इलाकों में खेती का काम बिगड़ गया। कहीं खेतों में नमी ही नहीं रही और फसलों की बढ़वार रुक गई। कहीं पानी की कमी से पैदावार पर बुरा असर पड़ने का डर खड़ा हो गया। खरीफ की फसलों को कम बारिश का नुकसान उठाना पड़ा है।
किसान बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी पर पहले ही अच्छी खासी रकम लगा चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी फिक्र यही है कि पैदावार कम हुई तो यह खर्च कैसे निकलेगा, घर की जरूरतें कैसे पूरी होंगी और अगली फसल की तैयारी कैसे होगी।
दीपावली खुशी का त्योहार है, पर सूखे की मार झेल रहे कई किसान परिवारों के लिए इस बार त्योहार मनाना भी मुश्किल लग रहा था। खेती में नुकसान और आमदनी की अनिश्चितता से गांवों में आर्थिक दबाव बढ़ा हुआ था। सरकार ने प्रभावित किसानों को तुरंत राहत देने के मकसद से यह रकम खातों में डाली है।
किसानों को उम्मीद है कि इस पैसे से वे घर का खर्च चला सकेंगे, दीपावली की खरीदारी कर पाएंगे और रोजमर्रा की जरूरतों में थोड़ी राहत पाएंगे। यह रकम खेती में हुए संभावित नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर सकती, फिर भी संकट के इस वक्त में इसे राहत भरा कदम माना जा रहा है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित किसानों तक मदद पहुंचाने का काम जारी है। माना जा रहा है कि लाभार्थियों की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे जिले के बाकी पात्र किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार की कोशिश सिर्फ इस तुरंत मिली मदद तक सीमित नहीं है। कम बारिश और सूखे से जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, उन्हें नियम के मुताबिक मुआवजा देने की प्रक्रिया भी अहम है। फसल नुकसान का आकलन और पात्रता के आधार पर किसानों को राहत दिलाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
फिर भी किसानों की चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। रबी सीजन की बुआई, खेतों की तैयारी और बीज व खाद के इंतजाम के लिए उन्हें फिर पूंजी चाहिए होगी। इसलिए किसान उम्मीद कर रहे हैं कि फसल नुकसान का सही मुआवजा समय पर मिले और सूखे के हालात को देखते हुए अतिरिक्त राहत भी दी जाए।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।