नागपुर जिला परिषद के जलापूर्ति विभाग में ठेकेदारों का धरना, इंजीनियर के कक्ष के बाहर हाथापायी
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बकाया बिलों और एफडीआर की रकम न मिलने से नाराज ठेकेदारों ने सोमवार को धरना दिया। विवाद बढ़ने पर पुलिस बुलानी पड़ी और देर रात तक कोई हल नहीं निकला।
नागपुर जिला परिषद के जलापूर्ति विभाग में सोमवार को ठेकेदारों ने धरना दिया। नाराजगी की वजह यह है कि जल जीवन मिशन और दूसरी जलापूर्ति योजनाओं के कामों के बिल अटके पड़े हैं। इसके साथ ही एफडीआर, यानी फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट, की रकम भी उन्हें वापस नहीं मिली है।
धरने के दौरान कार्यकारी अभियंता के कक्ष के सामने जमकर हंगामा हुआ। बात इतनी बढ़ी कि ठेकेदारों के बीच ही हाथापायी की नौबत आ गई। आखिरकार पुलिस को बुलाना पड़ा। देर रात तक इस मामले का कोई समाधान नहीं निकल पाया था।
ठेकेदारों का दावा है कि जल जीवन मिशन के तहत उन्होंने जो काम किए, उनके करोड़ों रुपये के बिल लंबित हैं। पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे ठेकेदारों के लिए अब काम का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। ऊपर से एफडीआर की रकम भी नहीं लौटी, इसलिए उनमें भारी नाराजगी है। दीपावली का त्योहार करीब है और भुगतान मिलने की उम्मीद कहीं दिखाई नहीं दे रही, इससे उनका गुस्सा और भड़क गया।
नाराज ठेकेदारों ने विभाग के दफ्तर के भीतर ही ठीया आंदोलन शुरू कर दिया। कुछ ठेकेदारों ने कहा कि जब तक एफडीआर की रकम उन्हें नहीं मिल जाती, तब तक कर्मचारियों को छोड़कर किसी को भी कार्यकारी अभियंता के कक्ष में जाने नहीं दिया जाएगा।
इसी बीच कुछ ठेकेदार कक्ष के अंदर जाने लगे और इसी पर विवाद शुरू हो गया। हालात ऐसे बन गए कि कार्यकारी अभियंता एक तरह से अपने ही कक्ष में कैद जैसे हो गए। पूरे दफ्तर में तनाव का माहौल बन गया।
ठेकेदारों के बीच झगड़ा बढ़ने पर पुलिस को बुलाया गया। लेकिन पुलिस के मौजूद रहने के बावजूद धरना खत्म नहीं हुआ। ठेकेदारों का रुख साफ है कि जब तक एफडीआर की रकम और लंबित बिलों के भुगतान पर कोई ठोस फैसला नहीं होता, वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे। देर रात तक उनका आंदोलन जारी था।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।