मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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दिवाली की खरीदारी में नागपुर के बाजार ठप, महल से इतवारी तक जाम से लोग परेशान

दिवाली की खरीदारी में नागपुर के बाजार ठप, महल से इतवारी तक जाम से लोग परेशान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

त्योहार की भीड़ के बीच महल, इतवारी, गांधीबाग, जरीपटका, सदर और धरमपेठ में जाम की शिकायतें हैं। पूर्व कॉर्पोरेटर संजय बालपांडे ने मनपा के प्रवर्तन विभाग पर शिकायतें अनदेखी करने का आरोप लगाया।

दिवाली की खरीदारी शुरू होते ही नागपुर के बड़े बाजारों में ट्रैफिक का हाल बिगड़ गया है। त्योहार का सीजन अपने चरम पर है, लेकिन शहर की पुरानी बदहाली जस की तस है। महल, इतवारी, गांधीबाग, जरीपटका, सदर और धरमपेठ से जाम की शिकायतें आ रही हैं। लोगों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस और नागपुर महानगरपालिका (मनपा) ने इस भीड़ को संभालने का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया।

बाजारों में हालत यह है कि लोग खुद ही जैसे-तैसे रास्ता निकाल रहे हैं। मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी बस 'मूकदर्शक' बने दिखते हैं। महल, इतवारी, गांधीबाग, बड़ीं, जरीपटका, सदर, धरमपेठ और सक्करदरा जैसे मुख्य व्यापारिक इलाकों में सड़कों और फुटपाथों पर अनधिकृत दुकानदारों और वेंडरों का कब्जा है। ऊपर से सड़कों पर बेतरतीब खड़ी गाड़ियां मुसीबत और बढ़ा देती हैं। कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक जवान भी काफी नहीं हैं, इसलिए जाम और गंभीर हो रहा है।

आयुक्त ने मिशन 100 डे की शुरुआत की थी, पर दिवाली से ठीक पहले बाजारों में इस मिशन की कामयाबी कहीं नजर नहीं आती। जमीनी तस्वीर इसके उलट है और बाजारों पर पूरी तरह कब्जा हो चुका है।

मध्य नागपुर के पूर्व कॉर्पोरेटर संजय बालपांडे का आरोप है कि मनपा का अतिक्रमण विरोधी दस्ता शिकायतों को नजरअंदाज करता है। उनके मुताबिक उन्होंने यह मुद्दा जनरल बॉडी की बैठक में उठाया था। मेयर नीता ठाकरे ने भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन बालपांडे के शब्दों में घरातल पर कुछ नहीं हुआ।

आम लोग भी नाराज हैं। विनोद जेठानी कहते हैं कि शहर में आना-जाना बेहद तनावपूर्ण हो गया है। ट्रैफिक में लगने वाला समय कई गुना बढ़ गया है और वे एजेंसियों की नाकामी की कीमत चुका रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी मार्ग पर जाने के लिए अब घंटी लग रहे हैं, इससे खरीदारी का मूड चौपट हो गया है और लोग घरों से निकलना ही नहीं चाहते। खासकर शाम को बाजार की तरफ जाना अपने लिए सिरदर्द मोल लेना हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ी समस्या तालमेल की कमी है। ट्रैफिक पुलिस सिर्फ अतिक्रमण का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती, और मनपा भी जन-बल की कमी का रोना रोकर पल्ला नहीं झाड़ सकती।

वेणुगोपाल अग्रवाल सवाल करते हैं कि जब हर साल दिवाली पर भीड़ होना तय है, तो प्रशासन पहले से योजना क्यों नहीं बनाता। वे पूछते हैं कि अधिकारियों की नाकामी की सजा आम जनता क्यों भुगते। नागपुर के प्रमुख बाजारों से लोगों का लगाव आज भी बना हुआ है। सबको पता है कि लोग आएंगे, फिर भी व्यवस्था सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता।

आरती कुशवाह का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदलती, इसीलिए इन दस्तों के काम करने के तरीके पर सवाल उठते हैं। उनके मुताबिक वे अपनी मर्जी से काम करते हैं। 'मेहरबानी' ज्यादा दिखती है और कार्रवाई कम। दिखावे के लिए गाड़ियां आती-जाती हैं, पर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों को कुछ दिखाई नहीं देता। पब्लिक हंसती भी है, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

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