मुंबई में राज्यपाल ने किया मिट्टी कैफे का उद्घाटन, दिव्यांगों को रोजगार का मौका
ओबेरॉय स्कायसिटी मॉल में खुले मिट्टी कैफे का उद्घाटन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने किया।
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मुंबई के ओबेरॉय स्कायसिटी मॉल में 'मिट्टी कैफे' (Mitti Cafe) का उद्घाटन राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा के हाथों हुआ। इस मौके पर राज्यपाल ने इस सामाजिक पहल की तारीफ की। उनका कहना था कि दिव्यांग लोगों की क्षमताओं को सही मौका, हौसला और सम्मान मिले तो वे अपने पैरों पर खड़े होकर समाज के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में विधायक अतुल भातखळकर, उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व विधायक सुभाष पासी और वरिष्ठ पत्रकार कुमार राकेश मौजूद थे। मिट्टी कैफे की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अलिना आलम और 'प्रोजेक्ट मुंबई' के संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिशिर जोशी भी आए थे। कैफे में काम करने वाले दिव्यांग सदस्यों के माता-पिता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
मिट्टी कैफे सिर्फ कैफे की एक चेन नहीं है। यह ऐसी सामाजिक पहल है, जो दिव्यांग लोगों को आर्थिक आत्मनिर्भरता और इज्जत के साथ जीने का मौका देती है। अलिना आलम ने इसे 2017 में शुरू किया था। इसका मुख्य मकसद शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक दिव्यांगता वाले वयस्कों को हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में रोजगार देना और उनके हुनर को मंच देना है।
अपने भाषण में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि इंसान का काम, उसकी कोशिश और लगन उसकी शख्सियत दिखाती है। हर भावना को जताने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं होती। कई बार काम की ईमानदारी ही विचार को बयां कर देती है। उन्होंने कहा कि मिट्टी कैफे में काम करने वाले दिव्यांग लोग अपने काम से यही साबित कर रहे हैं।
राज्यपाल ने अपील की कि कारोबार चलाते समय सिर्फ मुनाफे का नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग तबकों की क्षमताओं और जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांग लोगों के काम करने के तरीके से ज्यादा उनकी क्षमता, निष्ठा और लगन को अहमियत देना जरूरी है। रोजगार देकर उन्हें समाज की मुख्य धारा में शामिल किया जाए तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
ऐसी पहल दिव्यांग लोगों को देखने का समाज का नजरिया बदलने में मदद करती हैं। इस पहल से संदेश दिया जाता है कि दिव्यांग लोगों को सिर्फ मदद की जरूरत वाला तबका न मानकर समाज की तरक्की में सक्रिय साझेदार के रूप में देखा जाना चाहिए।
अलिना आलम ने इस सफर की जानकारी दी। एक छोटी टेबल और छतरी से शुरू हुई यह पहल आज देश भर में करीब 80 जगहों पर पहुंच चुकी है। बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रपति भवन, मुंबई, बंगळुरू और लखनऊ के एयरपोर्ट तथा नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट समेत कई जगहों पर मिट्टी कैफे चल रहे हैं। इंफोसिस, विप्रो और मर्सिडीज-बेंज जैसी कंपनियों के परिसर में भी कैफे चलाए जाते हैं।
अलिना आलम के मुताबिक इस पहल के तहत अब तक दो करोड़ से ज्यादा कप कॉफी ग्राहकों को परोसी जा चुकी है और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 80 लाख से ज्यादा थाली खाना बांटा गया है। उन्होंने कहा कि सही मौका और सहारा मिले तो दिव्यांग लोग खुद आत्मनिर्भर होने के साथ समाज के जरूरतमंदों की भी मदद कर सकते हैं।
उद्घाटन कार्यक्रम में कैफे के दिव्यांग सदस्यों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। दो सदस्यों ने अपने अनुभव मेहमानों के सामने रखे। राज्यपाल ने बौद्धिक दिव्यांगता वाले लोगों का बनाया केक काटा और फिर कैफे में पहला ऑर्डर दिया। व्हीलचेयर पर बैठे कैशियर और दिव्यांग वयस्क सदस्यों की टीम ने यह ऑर्डर परोसा।
कार्यक्रम से दिव्यांग लोगों के हुनर, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और समाज में सबको साथ लेकर चलने की भावना जगाने का संदेश दिया गया। आखिर में 'प्रोजेक्ट मुंबई' के संस्थापक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी शिशिर जोशी ने सभी का आभार माना।