मीरा-भाईंदर में हवा बिगड़ी, AQI 192 पर; 150 निर्माण साइटों को नोटिस के बाद भी धूल कम नहीं
मीरा-भाईंदर में AQI 192 दर्ज हुआ है। नगर निगम ने करीब 150 निर्माण साइटों को नोटिस दिए, फिर भी धूल पर काबू नहीं दिख रहा।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मीरा-भाईंदर शहर में चल रहे अलग-अलग विकास कामों की वजह से हवा का प्रदूषण दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है। लोगों को डर है कि इसका बुरा असर उनकी सेहत पर पड़ेगा। एक तरफ अक्टूबर महीने की बढ़ती गर्मी है, तो दूसरी तरफ हवा में फैला धुआं और निर्माण साइटों से उड़ती धूल। मीरा-भाईंदर के लोगों को इस दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।
शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 192 पर पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ है, जिससे प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो गई है। नगर निगम की तरफ से करीब 150 निर्माण साइटों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद लोगों की शिकायत है कि धूल रोकने के लिए असरदार उपाय जमीन पर दिखाई नहीं देते। इसी वजह से लोग गुस्से में सवाल पूछ रहे हैं कि शहर का विकास आखिर किसकी कीमत पर हो रहा है।
शहर में प्राइवेट निर्माण प्रोजेक्ट, मेट्रो का काम, सड़कों की खुदाई, गटर और नालों के काम समेत कई विकास काम चल रहे हैं। इन कामों की वजह से कई इलाकों में धूल बढ़ी हुई नजर आती है। ऊपर से गाड़ियों की बढ़ती आवाजाही है और हवा में प्रदूषक जमे रहने के हालात हैं, जिससे हवा की क्वालिटी गिरने की चिंता जताई जा रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शहर में AQI 192 है। हवा में PM 2.5 यानी बेहद बारीक कणों की मात्रा 114 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और PM 10 कणों की मात्रा 141 माइक्रोग्राम बताई जा रही है। ये आंकड़े किस अवधि के हैं और किस मॉनिटरिंग सेंटर के हैं, इसके हिसाब से इनका मतलब समझना जरूरी है। फिर भी हवा में बारीक कणों का बढ़ना लोगों की सेहत के लिहाज से चिंता की बात है।
AQI यानी हवा की गुणवत्ता का इंडेक्स प्रदूषण का स्तर समझने के लिए इस्तेमाल होता है। भारत के AQI वर्गीकरण में 101 से 200 का स्तर मध्यम (Moderate) श्रेणी में आता है, यानी 192 इस श्रेणी का ऊंचा स्तर है। इस स्तर पर संवेदनशील लोगों को सांस की तकलीफ हो सकती है। मीरा-भाईंदर के हवा प्रदूषण को लेकर शहर के क्लाइमेट एक्शन प्लान में भी निर्माण की धूल, कच्ची सड़कें और गाड़ियों का धुआं प्रदूषण के अहम स्रोत बताए गए हैं।
मीरा-भाईंदर में प्रदूषण का सवाल सिर्फ निर्माण साइटों तक सीमित नहीं है। यह शहर के पूरे विकास नियोजन से भी जुड़ा है। इसलिए प्रदूषण की वजहें पहचानकर उन पर लंबे समय के उपाय करना जरूरी है। लोगों को साफ हवा मिले, इसके लिए प्रशासन की कार्रवाई, बिल्डरों की जिम्मेदारी और नियमों का सख्ती से पालन, तीनों बातें अहम हैं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।